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अनाज से गोदाम भरे पड़े है : खाली करना सरकार की मजबूरी

-: प्रधानमंत्री ने खूब मूर्ख बनाया है जनता को

वरिष्ठ पत्रकार – महेश झालानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजबूरीवश नवम्बर तक अनाज वितरित करने की घोषणा करनी पड़ी । अगर यह घोषणा नही होती तो एफसीआई के गोदामो में अनाज और ज्यादा सड़ जाता । इस वक्त समूचे देश मे गोदाम गेंहू और चावल से लबालब भरे पड़े है तथा हजारों टन अनाज पूरी तरह सड़कर मलबे में तब्दील होगया है ।

हकीकत यह है कि एफसीआई के ओवरलोड गोदाम खाली नही किये जाते है तो अगली खरीद के लिए कोई स्थान शेष नही है । देश मे इस वक्त क्षमता से कई लाख टन अनाज का भंडार है । जुलाई में और खरीद की जाने वाली है, लिहाजा गोदामो को खाली करना बहुत आवश्यक है । इसलिए “प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना” के अंतर्गत अनाज वितरित करना प्रधानमंत्री की मजबूरी हो गई थी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल इसलिये नवम्बर माह तक अनाज वितरित करने का एलान किया था ।

भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में इस वक्त बफर स्टॉक से दुगना अनाज है । 30 जून तक 833 लाख मेट्रिक टन अनाज गोदामो में भरा पड़ा है । जबकि अनाज का सुरक्षित भंडार 411 लाख मेट्रिक टन ही होना चाहिए । ऐसे में गोदामो को खाली करना सरकार की बहुत बड़ी मजबूरी है । एफसीआई द्वारा 30 जून तक 388.4 लाख मेट्रिक टन अनाज की रिकार्ड खरीददारी की गई । यह खरीददारी अभी जारी रहेगी । गोदाम भरे होने की वजह से इस अनाज को खुले में ही रखना पड़ेगा ।

देश में खाद्यान्नों की खरीद कर जमा करने वाली केंद्र सरकार की एजेंसी भारतीय खाद्य निगम इस समय संकट के दौर से गुजर रहा है। खाद्य निगम के गोदाम तय नियम से लगभग दोगुणा अधिक भरे हुए हैं। ऐसे में, अक्टूबर से शुरू होने वाली चावल की खरीद के बाद हालात बिगड़ सकते हैं। वहीं, एफसीआई के सूत्रों ने बताया कि पिछले एक साल के दौरान गोदामो में रखा करीब 1550 टन अनाज खराब हो गया है।

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने अलग-अलग सीजन के लिए खाद्यान्नों का भंडारण नियम, जिसे बफर नॉर्म्स कहा जाता है बनाया हुआ है। इस नियम के मुताबिक, एफसीआई के पास 1 जुलाई को अधिकतम 411.20 मिलियन टन स्टॉक होना चाहिए, लेकिन केंद्रीय पूल में इसी 30 जून तक 832.69 मिलियन टन अनाज स्टॉक में है। यानी कि तय नियम से लगभग दोगुणा अधिक अनाज एफसीआई के पास जमा है । कुल जमा अनाज में 274.44 मिलियन टन चावल और 558.25 मिलियन टन गेहूं शामिल हैं।

सबसे अधिक अनाज 253.89 मिलियन टन पंजाब के गोदामों में हैं। इसके बाद हरियाणा के गोदामों में 131.63 मिलियन टन, फिर मध्य प्रदेश में 94.75 मिलियन टन जमा है। एफसीआई के एक अधिकारी ने बताया कि उनके गोदामों में ज्यादातर गेहूं जमा है । कवर्ड गोदामो के अलावा करीब 25 फीसदी अनाज खुले में पड़ा है । अब अक्टूबर में चावल की खरीद शुरू हो जाएगी ।

चावल को खुले में नहीं रखा जाता । लेकिन अब तक यह इस पर विचार नहीं किया गया है कि चावल कहां रखा जाएगा? ऐसी स्थिति में आने पर सबसे पहले गोदामों में बाहर रखे गेहूं को हटाया जाता है, इसके बाद अंदर (कवर्ड) में रखे गेहूं को बाहर निकालकर अंदर चावल रखा जाता है । अनाज और ज्यादा नही सड़ जाए इसलिये मोदी ने अनाज वितरण की अवधि बढ़ाकर जनता की झूठी वाहवाही लूटने की कोशिश की है ।

भारतीय खाद्य निगम और राज्य सरकार की एजेंसियों की भंडारण क्षमता 878.55 मिलियन टन है, लेकिन इसमें से 133.55 मिलियन टन कैप (खुले) की है । इसके अलावा एफसीआई की कुल भंडारण क्षमता 407.31 मिलियन टन है । मजेदार बात यह है कि पंजाब में 253.89 मिलियन टन अनाज गोदामो में जमा है । जबकि भंडारण क्षमता 234.51 मिलियन टन है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि लगभग 20 मिलियन टन अनाज कहां रखा गया है ?

इतना ही नहीं, पंजाब में 75.60 मिलियन टन अनाज खुले (कैप) में रखा हुआ है । इसमें से बहुत सारा अनाज खराब हो चुका है । इसी तरह हरियाणा, जहां गोदामों (केंद्रीय व राज्य एजेंसियों) में 131.63 मिलियन टन जमा है । जबकि वहां की कुल भंडारण क्षमता 127.60 मिलियन टन है। यहां भी लगभग 4 मिलियन टन अनाज कहां रखा गया है, यह समझ से परे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि भंडारण को लेकर मोदी सरकार पिछले कार्यकाल में अपनी चिंता जाहिर कर चुकी है और 2017 में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के तहत 100 लाख टन क्षमता के स्टील साइलो के निर्माण का लक्ष्य रखा था । लेकिन 31 मई 2019 तक सरकार केवल 6.75 लाख टन क्षमता के स्टील साइलों का ही निर्माण कर पाई है । इस मे से मध्य प्रदेश में 4.5 लाख टन और पंजाब में 2.25 लाख टन स्टील साइलो बन पाए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार अनाज की सुरक्षा के प्रति कितनी गंभीर है ।

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