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अन्तरराष्ट्रीय क्षितिज को पार कर बीकानेर को पहचान दिलाने का श्रेय भीखाराम चांदमल के नाम

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भीखाराम चाँदमल का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है. देश एवं अंतराष्ट्रीय सीमाओं के पार आज बीकानेर के नमकीन एवं मिठाईयों क़ी महक पसर रही है तो इसके पायोनियर बीकानेर के भीखा राम चाँद मल ही है.
संस्थापक स्व. सेठ मोहन लाल जी अग्रवाल क़े चार पुत्रों ने 200 से भी अधिक वर्षो से स्थापित स्वाद की इस शालीन परम्परा को जिस कदर सच बनाया है वो इस लजाजत का वाहक है.
।बीकानेरी भुजिया, नमकीन एवं पापड़ सहित स्वास्थ्य को समर्पित अनेको स्वादिष्ट उत्पादों को ले कर राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय मानको क़े अनुरूप खाद्य सामग्री क़े निर्माण में भीखाराम चाँदमल ने अपनी जबरदस्त छाप समूचे विश्व पर छोडी है।सही मायनों में बीकानेरी नमकीन क़े अविष्कारक बीसी ने सख्त परिश्रम और स्वास्थ्य क़े साथ साथ स्वाद की लजाजत और गुणवत्ता को बनाये रखा है वो अन्यत्र कहीं देखने में नहीं आता.
बीसी समूह क़े चारों भ्राताओं की सार्थक मेहनत क़े सारथी बीसी समूह क़े निदेशक अनुज भ्राता हरिराम जी अग्रवाल की दूरदर्शिता एवं सूझ बूझ सहित श्रमसाध्यता को रेखांकित करें तो हम पाएंगे की उन्होंने जबरदस्त मेहनत करके जो मुकाम हासिल किया है वो अपने आपमें बेमिसाल है.
1961 में जन्मे हरिराम अग्रवाल जी ने जैन पीजी कॉलेज से 1981 में बीकॉम किया. हरिराम जी ने 14 वर्ष की किशोरवस्था में ही अपने पिताश्री एवं तीनों अग्रज भ्राताओं क़े साथ व्यवसाय की तमाम बारीकीयों को समझना शुरू कर दिया था और कंधे से कन्धा मिला कर काम करना शुरू किया. बीकानेरी नमकीन को अंतराष्ट्रीय क्षितीजो क़े पार पहुँचाने क़े गौरवपूर्ण कार्य का श्रेय हरिराम जी को ही जाता है. अपने अग्रज नवरतन जी अग्रवाल एवं नई पीढ़ी क़े नव व्यवसाई बच्चों क़े साथ इस व्यापार को बीकानेरियत क़े स्वाद और परम्पराओ क़े हिसाब से विश्व क़े हर पटल पर पहुंचा कर हरिराम अग्रवाल ने जो नाम बीकानेर को दिया है वो अन्यत्र कहीं संभव नहीं. कोरोना महामारी क़े विकराल दौर में हरिराम जी ने न केवल अपने कार्मिक कर्मचारियों को बल्कि उनके परिजनों तक को जो सुविधाएँ उपलब्ध करवाई वो अनुकरणीय है. खाना पीना रहना सहित मेडिकल जरूरतों तक का ख्याल रखते हुए उन्होंने यह साबित किया की इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है.
परम्परा को सहेज कर चल रहे हरिराम जी अग्रवाल ने बीसी क़े आदर्श वाक्य खाओ खिलाओ रिश्ते बनाओ की सार्थकता स्थापित की है जो इंसानियत की अभूतपूर्व व्याख्या है लिहाजा ऐसी शख्शियत का सम्मान करके सम्मान स्वयं अभिभूत है. ऐसे होनहार उद्यमी एवं मरुधरा के सपूत आदरणीय हरिराम जी अग्रवाल का सम्मान वास्तव में हम सबका सम्मान है।

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