नई दिल्ली,(दिनेश शर्मा “अधिकारी”)।दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में आर्म्स एक्ट के तहत आरोपी एक व्यक्ति को 10 दिनों के लिए अंतरिम जमानत दी थी ताकि वह अपनी बेटी के एलएलबी कोर्स के लिए फीस की व्यवस्था कर सके।
न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की खंडपीठ ने निहाल अहमद बनाम राज्य के मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि जमानत की अवधि नहीं बढ़ाई जाएगी और दस दिन की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपी को आत्मसमर्पण करना होगा।
कोर्ट के मुताबिक, आरोपी की हरकतों से आरोपी के परिवार को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
मौजूदा मामले में, आरोपी ने 2011 की एक प्राथमिकी में अंतरिम जमानत मांगी, जिसमें उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 452,506, 325 और 34 और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध किया और अदालत को सूचित किया कि आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है और वह एक अन्य मामले में भी शामिल था।
अदालत के समक्ष, आरोपी के वकील ने प्रस्तुत किया कि आरोपी की बेटी की कॉलेज फीस जमा करने की अंतिम तिथि 15 नवंबर है और वह पैसे की व्यवस्था करने में असमर्थ था क्योंकि वह पिछले नौ महीनों से न्यायिक हिरासत में था।
प्रस्तुतियाँ सुनने के बाद, उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपी के परिवार को उसके कार्यों के कारण पीड़ित नहीं किया जा सकता है और आरोपी को जमानत दे दी है।
अपनी बेटी के एलएलबी कोर्स की फीस हेतु पैसे की व्यवस्था करने के लिए हाईकोर्ट ने पिता को दी अंतरिम जमानत

