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अपरहण के मामले में सामोद पुलिस गंभीर नहीं

-दर्ज की गुमशुदगी, 5 दिन बाद भी आरोपी पकड़ से दूर

– हरीश गुप्ता
जयपुर। राजधानी की सामोद थाना पुलिस अपनी अलग ही नियम कायदों से चलती है। उसे उच्च अधिकारियों की परवाह नहीं है, यही कारण है कि अपहरण जैसे मामले में 5 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। अब पुलिस आरोपी को बचाने के लिए पीड़ित पर बयान बदलने का दबाव बना रही है।
मामला इलाके के फतेहपुरा गांव का है। यहां रहने वाले ग्रामीण का 14 वर्षीय बेटा 31 अगस्त की सुबह घर से रहस्यमय ढंग से लापता हो गया। दोपहर बाद परिजनों ने तलाश शुरू की। काफी तलाश के बाद भी जब वह नहीं मिला तो शाम को परिजनों ने थाने में अपहरण की रिपोर्ट दी। पुलिस ने रिपोर्ट पर गुमशुदगी दर्ज कर ली।
परिजनों ने अपने स्तर पर तहकीकात की तो पता चला कि कुछ दूरी पर रहने वाला उनका एक रिश्तेदार बाबू के साथ उसे देखा गया था। इस पर उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी दे दी और बाबू के ठिकानों पर निगरानी रखनी शुरू कर दी। शिकंजा कसते देख आरोपी बच्चे को बेसुध हालत में परिवादी के घर के पास 1 सितंबर की रात में छोड़ कर भाग गया।

परिजनों की मानें तो उन्होंने पुलिस को पूरा घटनाक्रम बता दिया, लेकिन पुलिस आरोपी से पूछताछ ही नहीं कर रही। उल्टे परिजनों पर दबाव बना रही है कि वह यह बयान दे दे कि बालक अपनी मर्जी से गया था और लौट आया। वास्तविकता यह है कि बालक आज भी डरा और सहमा हुआ है। कैद रहने की याद आते ही रोने लग जाता है। अब परिजनों ने एसपी शंकर दत्त शर्मा से न्याय की गुहार लगाई है। उन्हें विश्वास है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा।

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