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अपराधियों का गढ बनी बीकानेर की औद्योगिक फैक्ट्रिया

-मुकेश पूनिया-
बीकानेर। शहर के औद्योगिक क्षेत्रो की फैक्ट्रिया पिछले लंबे अर्से से अपराधियों का गढ बनी हुई,इन फैक्ट्रियों में काम करने वालों में श्रमिकों में बड़ी तादाद में ऐसे लोग भी शामिल है जो बाहरी प्रांतों के अपराधी है,इनमें सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल,यूपी और बिहार के अपराधी शामिल है। मगर चौंकाने वाली बात यह है कि फैक्ट्री मालिकों द्वारा इनका सत्यापन नहीं करवाये जाने के कारण इन अपराधियों के चेहरे सामने नहीं आ रहे है,जो कभी घातक साबित हो सकत है। औद्योगिक जगत से जुड़े जागरूक लोगो का दावा है कि यहां रानी बाजार औद्योगिक क्षेत्र,खारा औद्योगिक क्षेत्र,करणी आद्योागिक क्षेत्र समेत आस पास की तमाम फैक्ट्रियों में ऐसे हजारों की तादाद में श्रमिक काम कर रहे है,जिनका पुलिस सत्यापन नहीं कराया है और इनमें बड़ी तादाद में बाहरी प्रांतो के अपराधी भी शामिल है। इनमें महज अपराधी तत्व ही नहीं शराब और नशेबाज भी शामिल है,इनके अपराधी कारनामें भी लगातार सामने आ रहे है फिर ना तो फैक्ट्री संचालक गंभीरता दिखा रहे है और ना ही पुलिस। जानकारी में रहे कि बाहरी प्रांतों के श्रमिक सस्ते में मजदूरी के लिये तैयार हो जाते है इसलिये फैक्ट्री संचालक इन्हे बिना किसी जांच पड़ताल और सत्यापन के ही अपनी फैक्ट्रियों मे काम पर लगा लेते है। ज्यादात्तर श्रमिक फैक्ट्रियों के आवासों और आस पास किराए के मकानों में रहते है। जो आये दिन फैक्ट्रिया भी बदलते रहते है फैक्ट्रियों के अलावा इन श्रमिकों को घर पर काम करने के लिये बुला लेते है। अपराधी किस्म के श्रमिक काम के बहाने अपने मालिकों की फैक्ट्री और घरों की रैकी करने से नहीं चुकते और मौका मिलने पर अपराधिक वारदात को अंजाम दे जाते है। पुख्ता खबर है कि बीकानेर के औद्योगिक क्षेत्रों की अस्सी फिसदी फैक्ट्रियों के श्रमिकों का पुलिस सत्यापन नहीं है।

लगातार सामने आ रही है संगीन वारदातें
फैक्ट्रियों में श्रमिक बनकर छूपे बैठे अपराधी तत्वों की वारदातें भी लगातार सामने आ रही है। जानकारी में रहे कि हत्या और लूट की संगीन वारदात का सजाफ्ता मुजरिम संतोष चौपाल उर्फ संतोष बिहारी तो बीकानेर के अपराध जगत का कुख्यात अपराधी है जो पिछले तीन साल से फरार है,संतोष बिहार का नाम हथियारों तस्करी में सामने आ चुका है,पुलिस सालभर से इसकी सरगर्मी से तलाश में जुटी है,इसने बिहार से लेकर बीकानेर तक अपना नेटवर्क बना रखा है। इसी तरह पिछले दिनों बीछवाले इलाके में एक बिहारी श्रमिक नन्ही बालिका को अगुवा करने के जुर्म में पकड़ा गया था,जो कि बदनियति से बालिका को सुनसान जगह पर ले जा रहा था। यह तो गनीमत रही कि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसे दबोच कर बालिका को सुरक्षित दस्तयाब कर लिया वरना बीकानेर के माथे में पर शर्मनाक वारदात का दाग लग जाता। इसी तरह करणी औद्योगिक क्षेत्र में भी होली की रात एक श्रमिक परिवार के घर में घुसे अपराधी किस्म के श्रमिकों ने अपना तांडव दिखाया था,उन्होने पीडि़त परिवार को इस कदर डरा धमका दिया कि पीडि़त परिवार ने पुलिस में भी शिकायत दर्ज नहीं करवाई और होली के दो दिन पीडि़त परिवार कहीं ओर पलायन कर गया। यही नहीं अवैध शराब बेचने और जुएबाजी के मामले में तो औद्योगिक क्षेत्रों के श्रमिक आये दिन पकड़े जाते है,इसके अलावा कई श्रमिक हथियार और मादक पदार्थो की तस्करी में भी पकड़े जा चुके है।

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