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आज्ञा ही धर्म है, जिनशासन के लिए हो समर्पण : साध्वी सौम्यदर्शना



बीकानेर। जिन शासन की रक्षा हेतु प्राणों को भी न्यौछावर करना पड़े तो कभी हिचकिचाना नहीं। उक्त प्रवचन सोमवार को रांगड़ी चौक स्थित साध्वी सौम्यदर्शना ने व्यक्त किए। साध्वी सौम्यदर्शना ने कहा कि आज्ञा प्रधान शासन है जिन शासन। आज्ञा ही धर्म है। परमात्मा ने सभी जीवों के प्रति कल्याण चाहा है। परमात्मा की आज्ञा है जिन धर्म का पालन करो, जिन मंदिरों का निर्माण अथवा जीर्णोद्धार करो, पूजन करो व जप-तप करो। साध्वीश्री ने तीन प्रकार की हिंसा के बारे में बताया। प्रथम स्वरूप हिंसा- आवश्यक क्रियाओं के दौरान हो लेकिन अंत:करण में करुणा के भाव हो उसे स्वरूप हिंसा कहते हैं। दूसरा हेतु हिंसा यानि खेती-बाड़ी तथा व्यवसाय के दौरान होने वाली हिंसा हेतु हिंसा कहलाती है। तीसरी हिंसा अनुबंध हिंसा अर्थात जो हिंसा कठोर हो, जान-बूझ कर हो उसे अनुबंध हिंसा कहते हैं। साध्वीश्री ने माता-पिता की आज्ञा पालन, तिलक की महत्ता के बारे में बताया। संघ पूजा का लाभ रोशनलाल सुरेन्द्र कोचर परिवार द्वारा लिया गया।

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