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आत्मकथा की जबरन बिक्री पर राजभवन ने दी सफाई

जयपुर,(दिनेश”अधिकारी”)। राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र की आत्मकथा की प्रतियां प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को जबरन बेचे जाने के मामले में अब राजभवन ने सफाई दी है। ट्विटर पर दिए गए स्पष्टीकरण में कहा गया है कि पुस्तक विपणन संबंधी कतिपय समाचार प्रकाशक औऱ खरीददार के बीच की निजी जानकारियां हैं। प्रकाशक आईआईएमई शोध संस्थान ने राजभवन में पुस्तक के लोकार्पण की अनुमति मांगी थी, जो उसे दी गई। पुस्तक विपणन की व्यावसायिक गतिविधि में राजभवन की किसी प्रकार की कोई भूमिका नहीं है।

उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी अखबार—‘इंडियन एक्प्रेस’ में छपी खबर में बताया गया है कि राज्यपाल की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर गत एक जुलाई को राजभवन में आयोजित पुस्तक-” निमित्त मात्र हूं मैं” के लोकार्पण समारोह में प्रदेश के 27 सरकारी विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलर भी शामिल हुए थे। लौटते समय इन सभी को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि उनकी कारों में पुस्तक की 19 प्रतियों के दो कार्टन औऱ 68,383 रु, का बिल रखा गया है। एक अन्य प्रति भेंटस्वरूप रखी गई है।

अखबार ने समारोह में शामिल एक कुलपति के हवाले से बताया है कि समारोह के बाद सभी कुलपतियों की राज्यपाल के साथ बैठक हुई, जिसमें किसी ने उन सभी से कार चालकों के नाम व नंबर पूछे थे। उन्होंने यह सोच कर नाम व नंबर दे दिए कि शायद चालकों को नाश्ता-पानी देने के लिए ये मांगे गए हैं। इन कुलपति ने आगे बताया कि उन्होंने घर पहुंचकर बिल पर निगाह डाली तो चौंक गए। बिल में पांच पुस्तकों का नाम लिखा गया गया, जबकि कार में रखे गए कार्टनों में सभी पुस्तकें महामहिम की आत्मकथा थीं। बिल 3,999रु, प्रति पुस्तक के हिसाब से 75, 981 रु, का है, जिसमें से 10 फीसदी डिस्काउंट काटकर कुल योग 68,383 रु, अंकित है। राज्यपाल मिश्र के लंबें समय तक ओएसडी रहे गोविंदराम जायसवाल पुस्तक के सह-सम्पादक हैं। उन्होंने अखबार को बताया कि आत्मकथा की बिक्री से प्राप्त राशि को राजस्थान में ही शोधकार्यों पर खर्च किया जाएगा। यह राशि किसी भी प्रकार से व्यक्तिगत उपयोग में नहीं ली जाएगी। इधर, सारे कुलपति परेशान हैं कि वे किस मद से पुस्तक खरीद की बड़ी राशि का भुगतान करें।महामहिम की आत्मकथा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह के कमल के फूल की पृष्ठभूमि वाले फोटो, भाजपा में शामिल होने अपील आदि पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

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