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आदिवासियों की अनूठी संस्कृति, जीवनशैली,एवं बोलियों को संरक्षित करना  जरूरी: न्यायधीश सूद

रालसा की पहल से ” विश्व आदिवासी दिवस ” पर झुंझनू में जागरूकता अभियान

झुंझनू,(दिनेश”अधिकारी”) राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार आज” विश्व आदिवासी दिवस” के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव न्यायधीश श्रीमती दीक्षा सूद ने ऑनलाईन कार्यक्रम में उपस्थित श्रोतागण को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक वर्ष 09 अगस्त को” विश्व आदिवासी दिवस या विश्व के देशज़ लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस ” मनाया जाता है। इस वर्ष 8 माननीय रालसा द्वारा ‘‘आदि महोत्सव’’ के रूप में इस दिवस को एक त्यौहार के रूप में मनाया जा रहा है।न्यायधीश श्रीमती सूद ने आगे बताया कि 09 अगस्त, 1982 को जेनेवा, स्वीट्जरलैण्ड में देशज़/आदिवासी आबादी पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह की पहली बैठक आयोजित की गई थी। जिसके परिप्रेक्ष्य में प्रतिवर्ष इस दिनांक को आदिवासी दिवस मनाया जाता है। इसके आदिवासियों की अनूठी संस्कृति, जीवनशैली, विभिन्न प्रकार की बोलियों आदि को संरक्षित करने के प्रयास किए जाते है। इस दिवस का उद्देश्य जनजातीय समूहों/समुदायों द्वारा समाज को बेहतर बनाने की दिशा में किए गए योगदानों और उपलब्धियों को रेखांकित करना भी है। इस दिवस के द्वारा सामंजस्य और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना, ज्ञान साझाकरण और अच्छी प्रथाओं के प्रसार के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाना, देशज भाषाओं को एक स्टैंडर्ड-सेटिंग में एकीकृत करने, विकास को बढ़ावा देने के लिए नए ज्ञान के विस्तार करने हेतु लोगों को प्रेरित करना है। इसी के साथ विधिक जागरूकता के तहत महिला सशक्तिकरण, सम्मान व गौरव , नालसा व रालसा द्वारा जारी विभिन्न स्कीम, हेल्प2चिल्ड्रन, जनउपयोगी सेवाएं आदि विषयों की भी जानकारी दी

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