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आयरन लेडी पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती गांधी व लौहपुरूष पटेल का किया स्मरण

दोनों ही महान हस्ती के बताए मार्ग पर चलने आव्हानश्रीडूंगरगढ़ में हुई संगोष्ठीश्रीडूंगरगढ़, 31 अक्टूबर। आयरन लेडी पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि औेर लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के 144 वें जन्म दिवस के अवसर पर गुरूवार को श्रीडूंगरगढ पंचायत समिति सभागार में राष्ट्रीय एकता दिवस पर संगोष्ठी का आयोजजन हुआ।श्रीडूंगरगढं उपखण्ड अधिकारी राकेश नायल की अध्यक्षता में हुई संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत बना शक्तिशाली देश बना, उनके नेत्तृव में भारत ने नई ऊंचाइयों को छुआ। वहीं सरदार पटेल का स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र की एकता और अखंडता में उनका योगदान को अविस्मरणीय बताया।उपखण्ड अधिकारी राकेश नायल ने श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुए अपनी बात ’मत उलझ किनारों से, तैर कर, दरिया पार कर, कुचल ने नफरतों को पैरों के तले, मोहब्बत से सरोकार कर, खोल ले तू दुकान फलों की , खुशबूओं को व्यापार कर, सब तेरे अपने है प्यारे, सबको तू लगा गले से, तू सबसे प्यार’ शेर से की । उन्होंने कहा कि वर्तमान मंे देश मंे भाईचारा और आपसी विश्वास का माहौल बनाने की जरूरत है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत एक शक्तिशाली देश बना था। देश ने हर क्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल किया। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा विदेश नीति को नई दिशा मिली। भारत परमाणु शक्ति बना। उन्होंने सरदार पटेल को याद करते हुए कहा कि भारत के प्रथम गृह मंत्री के रूप में सरदार पटेल ने देशी रियासतों को एक करने का ऐतिहासिक काम किया। उनकी नजर जहां हैदराबाद, जूनागढ़ और अन्य राज्यों पर केंद्रित थी तो वहीं उनका ध्यान दक्षिण में लक्षद्वीप जैसे छोटे इलाकों पर भी था।तहसीलदार मनीराम खिचड़े़ ने कहा कि 16 वर्ष तक देश की प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी के शासनकाल में कई उतार-चढ़ाव आए। लेकिन 1975 में आपातकाल जैसे मुद्दें पर इंदिरा गांधी को भारी विरोध-प्रदर्शन और तीखी आलोचनाएं भी झेलनी पड़ी थी। बावजूद इसके रूसी क्रांति के साल में पैदा हुईं इंदिरा गांधी ने 1971 के युद्ध में विश्व शक्तियों के सामने न झुकने के नीतिगत और समयानुकूल निर्णय क्षमता से पाकिस्तान को परास्त किया और बांग्लादेश को मुक्ति दिलाकर स्वतंत्र भारत को एक नया गौरवपूर्ण क्षण दिलवाया। लेकिन 31 अक्टूबर 1984 को उन्हें अपने अंगक्षक की ही गोली का शिकार होना पड़ा और वह देश की एकता और अखंडता के लिए कुर्बान हो गईं।इस अवसर पर सेवानिवृत तहसीलदार श्याम महर्षि ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि और भारत के लौह पुरुष और देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित कर करते हुए उनके कार्यों स्मरण किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग दो कार्यक्रमों में लोगों को देश की एकता और अखंडता की शपथ दिलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं, धर्र्माें और संस्कृति को धारण किए हुए है। यही विभिन्ना हमारी एकता का आधार है। उन्होंने समय-समय पर हुए युद्धों के बारे बताते हुए कहा कि इन युद्धों के दौरान पूरे देश ने एकता का परिचय देते हुए नेतृत्व के साथ खड़ा रहा। उन्होंने कहा कि देश गवाह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर पूरा भारत मजबूती के साथ एक साथ खड़ा रहा है।विकास अधिकारी सुनील छाबड़ा ने कहा कि हरित क्रांति के कारण भारत खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भर बना। श्रीमती गांधी के ही नेतृत्व में बैंकों का राष्ट्रीयकरण और गरीबी उन्मूलन जैसे कदम उठाए गए। अखंड भारत के लिए उनके बलिदान पर पूरा देश गर्वित है। वे सिर्फ स्मृतियों में नहीं, आदर्शों में हर भारतवासी के हैं। साहित्यकार डाॅ.मदन सैनी ने भारत की एकता का प्रमुख कारण उसकी सांस्कृतिक विरासत को बताया है। श्रीमती इंदिरा के कठोर निर्णयों की वजह से आज देश मजबूती के साथ विकास के पथ पर अग्रसर है। इंदिरा गांधी को परिवार के माहौल में राजनीतिक विचारधारा विरासत में प्राप्त हुई थी। 1941 में ऑक्सफोर्ड से भारत वापस आने के बाद वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गईं। सन् 1947 के भारत विभाजन के दौरान उन्होंने शरणार्थी शिविरों को संगठित करने तथा पाकिस्तान से आए लाखों शरणार्थियों के लिए चिकित्सा संबंधी देखभाल प्रदान करने में मदद की।साहित्यकार चेतन स्वामी ने कहा कि एक समय ‘गूंगी गुडिया’कही जाने वाली इंदिरा गांधी तत्कालीन राजघरानों के प्रिवी पर्स समाप्त को प्रस्ताव को पारित कराने में सफलता हासिल करने, बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने जैसा साहसिक फैसला लेने और पृथक बांग्लादेश के गठन और उसके साथ मैत्री और सहयोग संधि करने में सफल होने के बाद बहुत तेजी से भारतीय राजनीति के आकाश पर छा गईं। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल और स्वर्गीय श्रीमती गांधी के सपनों को साकार करने में एकजुटता परिचय देते हुए विकास का मार्ग प्रशस्त करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमें अपने बच्चों को भारतीय इतिहास से परिचय कराने की जरूरत है।ब्लाॅक शिक्षा अधिकारी धर्मपाल, अध्यापक डाॅ. राधा कृष्ण और प्राचार्य आदूराम ने कहा कि स्वर्गीय श्रीमती गंाधी और लौह पुरूष सरदार पटेल ने देश को जो दिशा दी थी, उसे कायम रखना हर भारतीयों का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि इंदिरा के बारे में सबसे सकारात्मक बात यह है कि वह देश की नब्ज को समझती थीं और अपने साथियों से उनका बेहतरीन तालमेल था। गरीबी मुक्त भारत इंदिरा का एक सपना था। सभी लोगों को भारत से गरीबी को मिटाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए, ताकि उनके सपने को हकीकत में तब्दील किया जा सके।इससे पहले उपखण्ड अधिकारी ने संगोष्ठी में शामिल प्रतिभागियों को ’राष्ट्रीय एकता दिवस’ की शपथ दिलाई। संगोष्ठी में विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के अध्यापक, शिक्षक, राजस्व सेवा के कार्मिक आदि शामिल हुए।

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