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आर्थिक व सामाजिक विकास में उद्योगों की अहम भूमिका-आयुक्त, उद्योग

संभाग स्तरीय कार्यशाला में उद्वमियों से वन टू वन संवाद
बीकानेर में निवेश व औद्योगिक विकास की असीम संभावनाएं-गौतम

बीकानेर, 29 नवम्बर। उद्योग आयुक्त मुक्तानन्द अग्रवाल ने कहा कि राज्य के आर्थिक व सामाजिक विकास में उद्योगों की अहम भूमिका है। विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र में जो औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की इकाइयां काम कर रही है वे रोजगार सृजन करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रोजगार बढ़ने से आय बढ़ती है और राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य रोजगार सृजन करना है।

अग्रवाल ने कहा कि औद्योगिक विकास के माध्यम से रोजगार व आय सृजन के विस्तार को देखते हुए राज्य सरकार गंभीर है। लघु व सूक्ष्म उद्योगों के विकास व निवेश के लिए राज्य सरकार शीघ्र ही नई पोलिसी लाने जा रही है इसका उद्देश्य नियमों का सरलीकरण करना है ताकि उद्योग लगाने व चलाने की प्रक्रिया और सरल बन सके। आयुक्त ने कहा कि जुलाई 2019 में राजस्थान एमएसएमई फैसिलिटेशन एक्ट 2019 के माध्यम से राज्य में किसी भी नए उद्यमी को अपना उद्योग स्थापित करने के बाद 3 वर्ष तक राज्य सरकार के किसी भी कानून या किसी भी नियम में कोई एनओसी सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। 3 साल पूरे होने के बाद के 6 महीने में सम्बंधित उद्वमी एनओसी या पंजीकरण की प्रक्रिया संपन्न कर सकते हैं।
अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में युवाओं के सामने रोजगार का बड़ा संकट खड़ा है ऐसे में समाज के उद्योगपतियों की भूमिका और भी बड़ी हो जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि सरकारी नियमों की वजह से उद्यमियों को परेशानी ना उठानी पड़े तथा एक आम बेरोजगार को भी सरकारी योजनाओं की जानकारी मिले ताकि वे भी सरकारी मदद से लाभ उठा सके और रोजगार सृजन में अपनी भूमिका निभा सके। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्धेश्य उद्यमियों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का समय पर निस्तारण करते हुए वातावरण निर्माण करना है।

की जिला कलक्टर की सराहना
आयुक्त ने कहा कि बीकानेर जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम कलक्टर के तौर पर प्रोएक्टिव रह कर यहां के उद्यमियों और आमजन की मदद के लिए तत्पर है। ऐसे में बीकानेर में एग्रो प्रोसेसिंग इडस्ट्री, फूड पार्क, सौर व अन्य क्षेत्रों में निवेश करने वाले उद्यमियों को जिला प्रशासन के माध्यम से और मदद मिल सकेगी। उद्यमी अपने जिले की क्षमता और मजबूती को पहचाने तथा उसमें बेहतर करने की दिशा में सरकार के साथ मिलकर कार्य करें, उनकी समस्याएं सुनकर समाधान के पूरे प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही वन स्टाॅप शाॅप स्थापित किया जाएगा, जिसमें तय समय में एनओसी दिलाने के लिए एक ही छत के नीचे विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी उपस्थित रह कर उद्यमियों की मदद करेंगे। औद्योगिक विकास में स्थानीय उद्यमियों से राज्य सरकार को काफी अपेक्षा है।
इस अवसर पर जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने कहा कि उद्यमियों से संवाद बेहतरीन शुरूआत है। इससे सरकार की औद्योगिक पोलिसी की धरातल पर चर्चा होगी और धरातल की समस्याओं से राज्य सरकार को रूबरू होने का अवसर मिलेगा और इनका समाधान हो सकेगा। गौतम ने कहा कि उद्योगों की अहम भूमिका है क्योंकि उद्योग समृद्व होगा तो जीडीपी बढ़ेगी और जीडीपी बढ़ी तो राज्य समृद्ध हो सकेगा। सरकार ने सुगमता से उद्योग लगे व चले इसके लिए विवाद और शिकायत निस्तारण तंत्र जिला स्तर पर विकसित किया है। उन्होंने कहा कि बीकानेर में भूमि, पानी, बिजली की पर्याप्तता को देखते हुए औद्योगिक विकास की अपार संभावना है।
गौतम ने कहा कि बीकानेर में वायु, रेल तथा सड़क मार्ग से कनेक्टिविटी की अच्छी सुविधाएं उपलब्ध है। यहां फूड प्रोसेसिंग, सौर, सिरेमिक उद्योग को बढ़ावा मिले। उस्ता, कालीन जैसे परम्परागत उद्योगों को भी बचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से यहां के ग्रामीण व शहरी सभी क्षेत्रों में औद्योगिक विकास के लिए पूरी मदद दी जाएगी। गौतम ने कहा कि संगोष्ठी के प्रतिभागियों से सकारात्मक सुझाव व संवाद की अपेक्षा है।
इस अवसर पर जिला उद्योग संघ बीकानेर के अध्यक्ष डी पी पच्चीसिया ने बीकानेर उद्योगों व औद्योगिक क्षेत्रों की समस्याओं से अवगत कराया। कार्यक्रम में सिडबी, रीको, नाबार्ड, सिंगल विंडो क्लीयरेंस एक्ट, सिंगल विंडो ऑनलाइन प्रणाली, मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना, निर्यात संवर्धन काउंसिल, ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बीआईपी, विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यशाला में उद्यमियों के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारियों का वन टू वन इंटरेक्शन सत्र आयोजित किया गया जिसमें उन्होंने अपनी अपनी समस्याएं रखी और अधिकारियों ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। खुले सत्र के दौरान उन्होंने अलग अलग तरह की समस्याएं आयुक्त को बताइ। इनमें फायर एनओसी नगर निगम द्वारा जारी नहीं करना, श्री डूंगरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र का 50 वर्षों के बाद भी विकसित न होना, खनन क्षेत्र में कार्य करने वाले उद्यमियों को विशेष रियायत देना, रीको द्वारा जो वर्तमान में सर्विस चार्ज लिया जाता है वह प्रदेश के सभी स्थानों पर समान स्लैव का होना गलत है, इसमें संशोधन करना, वाटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता हटाना तथा औद्योगिक इकाइयों में रहने वाले मजदूरों और अन्य लोगों के लिए पीने के पानी का भी व्यवसायिक शुल्क लेना जैसी समस्याओं से अवगत करवाया गया। आयुक्त ने सभी बातें सुनकर आवश्यक दिशा निर्देश देकर संशोधन करवाने का आश्वासन दिया। वूलन एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल कल्ला ने वूलन इंडस्ट्री की समस्याएं बताई। उन्होंने कहा कि बीकानेर सीमांत जिला है अतः यहां अतिरिक्त सुविधाएं मिलनी चाहिए। वूलन इंडस्ट्री गांधीजी के सपनों का साकार कर रही है ऐसे में गांधीजी की 150वीं जयंती पर इस क्षेत्र को अतिरिक्त सम्बल दिया जाए। कार्यक्रम अतिरिक्त जिला कलक्टर चूरू डॉ नरेंद्र थोरी, जिला उद्योग केंद्र चूरू के योगेश शर्मा, जीतमल अग्रवाल, अजीत सहित संभाग के सभी जिलों के उद्योग संघों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। बीकानेर जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक मंजू नैण गोदारा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन संजय पुरोहित ने बीकानेर के औद्वोगिक विकास पर प्रकाश डाला।

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