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आवंटी पत्रकार बकाया राशि देने को तैयार, फिर भी पट्टे क्यों नहीं दे रही सरकार



-पट्टे लेने वालों और देने वालों में आखिर लोचा क्या है….

-पहेली बन कर 10 बरसो से क्यों अधर झूल में है नायला योजना….

जयपुर,(दिनेश शर्मा “अधिकारी”)। ऐसे ही अनगिनत सवाल हर पत्रकार के मन में और उनके तथाकथित मठाधीशों और गत 10 वर्षों से डुबाई गई यह आवास योजना आखिर किस की बलि लेकर मानेगी, सरकार की या पत्रकारों की ..???
जेडीए की साफ सुथरी और अप्रूव्ड स्कीम नायला पत्रकार नगर को ऐसा उलझा कर रख दिया है कि अधिकारियों से लेकर 571 आवंटी तक चक्करघिन्नी बने हुए हैं। जेडीए रिकॉर्ड के अनुसार जेडीए की ताजा वेबसाइट पर भी पिंकसिटी प्रेस एनक्लेव ए, बी और सी अप्रूव्ड स्कीम है, जिसमे 571 अपने अपने प्लॉट के मालिक हैं। लेकिन 10 साल से पट्टे क्यों नहीं दे रहे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
पिंकसिटी प्रेस एनक्लेव, नायला पत्रकार नगर के 571 आवंटियों का मुख्यमंत्री निवास पर पहुंचकर आवंटन दस्तावेज जमा कराने का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। सोमवार को छठे जत्थे में शामिल आवंटियों ने सीएमआर पहुंचकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलाने की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में अधिकारी ओ एस डी ललित जी ने ही पत्रकारों के जत्थे से प्रार्थना पत्र और आवंटन के कागज जमा कर कहा कि मुख्य्मंत्री तक आपका पत्र भेज दिया जाएगा।
-सोमवार को पत्रकार आशुतोष निगम, दिनेश शर्मा “अधिकारी”, मुन्ना खान, मोहन सिंह और चंचल मोहन माथुर ने सीएमआर पहुंचकर अधिकारियों को 9 साल से अटके पट्टों की वास्तविकता से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जब उनके कागज सच्चे हैं। निर्धारित प्रक्रिया और पात्रता पूरी करने पर ही उन्हें प्लॉट आवंटित किए गए थे तो पट्टे क्यों नहीं दिए जा रहे। प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत सरकारी जमीनों तक के कब्जे नियमित किए जा रहे हैं। उनके तो जेडीए से नियमानुसार लॉटरी सिस्टम से स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा वर्ष 2013 में आवंटित प्लॉट हैं। जिसके रुपए भी जमा है। बाकी राशि सभी देने को तैयार हैं। चलो नायला संगठन के तत्वावधान में आवंटियों का आंदोलन पट्टे मिलने तक जारी रहेगा।

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