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ईद कपड़ों का नहीं अपनो का त्योहार है : समाजसेवी शमिमुद्दीन

– नमाज़,रोज़ा,हज जैसे एक इबादत है वैसे ही किसी ग़रीब और जरूरतमंद की मदद करना भी बड़ी इबादत

आगरा। ( रिपोर्ट अवधेश यादव )कोरोना संकट काल में चल रहे लाँकड़ाऊन के चलते हर कोई घर में बंद है। बहुत ही ज़रूरत पर ही लोग घर से बाहर निकल रहे हैं। मस्जिदों समेत सावर्जानिक तौर पर रोज़ा इफ़्तार जैसे कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा रहे हैं। रमज़ान माह का आख़री अशरा चल रहा है। रमज़ान के अलविदा जुमा और ईद उल फ़ितर के दौरान भी लाँकड़ाऊन फ़ोर लागू है। इस बार भी लाँकड़ाऊन का उल्लंघन ना हो सके इस के लिए समाजसेवी शमिमुद्दीन ने समाज के लोगों से ईद सादगी से मनाने की अपील कर रहे हैं।

समाजसेवी शमिमुद्दीन का कहना है कि इस संकट काल में देश के लोग ज़िन्दगी से लड़ रहे हैं,ऐसे में ख़ुशी के आयोजन का कोई मतलब ही नहीं बनता। ईद कपड़ों का नहीं अपनो का त्योहार है। ईद के लिए नए कपड़े पहनना ज़रूरी नहीं है जो उमदा हों उसी को पहन कर ईद मनाएँ। नमाज़,
रोज़ा,हज जैसे एक इबादत है वैसे ही किसी ग़रीब और जरूरतमंद की मदद करना भी बड़ी इबादत होती है। इस ईद उल फ़ितर के त्योहार को सादगी से मनाएँ। इस समय देश को हर किसी के योगदान की ज़रूरत है इस लिए हम निश्चय करें कि इस ईद पर ख़रीदारी नहीं करेंगे। ख़रीदारी की जगह हर बंदा तय करे कि किसी एक परिवार को एक महीने का राशन देगा, किसी एक ज़रूरतमंद के घर का एक महीने का किराया देगा। किसी भी व्यक्ति को काम शुरू करने में मदद करेगा। किसी के बीमारी के इलाज में मदद करेगा या किसी बच्चे की पढ़ाई- लिखाई में मदद कर सकते है।

संकट की घड़ी में इस ईद पर हर ग़रीब जरूरतमंद की मदद करनी चाहिए। वहीं,माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी के आदेशों का पूर्ण रूप से पालन कर सभी मुसलमान भाइयों को अलविदा ज़ुमे की नमाज़ अपने घरों में ही अदा करनी चाहिए।

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