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उपराष्ट्रपति ने गाई अर्जुन गाथा

बीकानेर, (हेम शर्मा )।बीकानेर के सांसद और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल उपराष्ट्रपति से पहले राष्ट्रपति को भी बीकानेर लाए थे। उनका सांस्कृतिक समागम का वो आयोजन सराहनीय प्रयास था, परंतु कार्यक्रम राजनीति के भेंट चढ़ गया था और उनकी थू थू हुई। उपराष्ट्रपति क्षेत्रीय मुंगफली अनुसंधान केंद्र बीकानेर में आए। इस आयोजन में भी कुर्सियां खाली रही। कार्यक्रम पूरी तरह राजनीति के भेंट चढ़ गया। कार्यक्रम में किसान कम अर्जुन राम मेघवाल के समर्थक भाजपाई ज्यादा थे। क्षेत्रीय मुंगफली अनुसंधान केंद्र के इस कार्यक्रम में मंच पर वैज्ञानिक भी कम थे और नेता ज्यादा रहे। बीकानेर से भाजपा के तीन विधायक, महापौर, खुद सांसद का क्या मतलब रहा ? क्या कार्यक्रम आयोजन के पीछे की मंशा को विरोधी नहीं समझ रहे हैं? किसानों का ध्यान उप राष्ट्रपति की ओर से भाजपा की तरफ आकर्षित करना रहा होगा ? उप राष्ट्रपति पद की गरिमा है। भारतीय लोकतंत्र में इस पद को राजनीतिक दलों से ऊपर देखा जाता है। इस पद से कही गई बात की अपनी गरिमा और साख होती है। उप राष्ट्रपति महोदय ने देश के विकास की तस्वीर रखी और कृषि क्षेत्र में प्रगति का श्रेय अप्रत्यक्ष में मोदी सरकार को दिया। यह बात कहना की अर्जुन मेघवाल के कहने पर प्रधानमंत्री ने उनको कृषक पुत्र कहा। नारी शक्ति वंदन विधेयक लाने का श्रेय भी मेघवाल को दिया। बेशक अर्जुन राम मेघवाल केंद्र सरकार में अच्छा काम कर रहे हैं, परंतु उप राष्ट्रपति की ओर से मंच से इस तरह अर्जुन गाथा गाना शोभा नहीं देता। यह कार्यक्रम क्यों हुआ ज्यादा मंच से स्पष्ट नहीं किया गया। अर्जुन राम के बारे में उप राष्ट्रपति ने जो कहा अतिशयोक्ति पूर्ण रहा। उपराष्ट्रपति ने कृषि में अनुसंधान को बढ़ावा देने, बीकानेर के खाद्य प्रसंस्करण और मुंगफली की ब्रांडिंग , वेल्युएडिशन और कृषि क्षेत्र में तकनीक को बढ़ाने की बात कह कर अच्छा संदेश दिया। किसान हित की योजना, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का उल्लेख कर मोदी सरकार की उपलब्धियों की तरफ लोगों का ध्यान खींचा। कार्यक्रम कितना सफल रहा यह अपना अपना नजरिया है, परंतु क्षेत्रीय मुंगफली अनुसंधान केंद्र की ओर से
उप राष्ट्रपति को इस आयोजन में बुलाने का प्रयोजन शायद श्रोता नहीं समझ पाएं होंगे ? कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति के सान्निध्य में भाजपा के नेता, विधायक और खुद सांसद शायद खुश हो रहे होंगे। यह आयोजन भारतीय लोकतंत्र में उप राष्ट्रपति के सान्निध्य में एक नजीर बन गया।

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