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एक दिवसीय हल्ला बोल धरने पर समस्याओं के पिटारे को लेकर श्रमिक शामिल हुए

बीकानेर /निर्माण श्रमिकों की मांगो को लेकर बीकानेर जिले की सक्रिय ट्रैड यूनियनों द्वारा गठित निर्माण श्रमिक संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में श्रम विभाग बीकानेर के आगे एकदिवसीय हल्ला बोल धरने का आयोजन रखा गया। धरने में शहर सहित विभिन्न गांव-गांव व ढ़ाणियों से निर्माण श्रमिक अपनी समस्याओं के पिटारे को लेकर धरने में शामिल हुए।

धरना स्थल पर सैकड़ो मजदूर अपने हाथों में निरस्त आवेदनों की अपीले व स्पष्टीकरण के के आवेदन तथा नारे लिखित तख्तियां लेकर पहुंचे। धरनार्थियों ने इन्द्रा कॉलोनी को रोड़ को जाम करते हुए तकरीबन दो घंटे नारे बाजी की। जनता के उग्र रवैये को देखते हुए श्रम कल्याण अधिकारी अब्दुल सलाम काजी ने धरनास्थल पर पहुंचकर श्रमिकों की बात सुनी और उपस्थित लगाकर कार्यालय से नदारद श्रम निरिक्षक खेमचंद कुमावत व भरत सुथार के लिए संयुक्त श्रम अधिकारी राजीव किशोर सक्सेना को दोनों श्रम निरक्षकों को सत्रह सीसी नोटिस जारी करने हेतु अनुशंसा की तथा बीकानेर के काजी ने बताया कि ये श्रम निरिक्षक मेरा कहना नहीं मानते और मेरे पास किसी भी प्रकार का पावर नहीं है।

संघर्ष समिति की शबनम बानौ ने असंतुष्ट होकर अपने लावेजाम सहित जिला कलेक्टर कार्यालय का रूख किया और श्रमिकों की समस्याओं को ज्ञापन कलेक्टर को प्रेषित किया। जिला न्यायाधीश ने आश्वासन दिया कि अतिशीघ्र श्रम अधिकारियों के खिलाफ संज्ञान लिया जायेगा। श्रमिक नेता धर्मवीर गोदारा ने सम्बोधित करते हुए कहा कि मजदूरों का शोषण अब सहन नहीं किया जायेगा। सवा लाख पंजीकृत मजदूरो के हक लिए संघर्ष समिति राज्यव्यापी आंदोलन करने की तैयारी कर रही है समिति के पदाधिकारी, पूर्ण सिंह मेहरा, नवीन आचार्य, आर.एस.हर्ष, तोलाराम राम गोदारा ने धरने सम्बोधित करते हुए कहा कि श्रम विभाग अपनी हठधर्मिता के चलते मजदूरों के आवेदनों को फुटबाल बनाकर बार श्रमिकों को श्रम विभाग के चक्कर काटने को मजबूर किया जा रहा है।

मजदूर को भौतिक सत्यापन, फ्रदर जांच, फैक एम्प्लॉयर, अंशदान रशीद, जीवित प्रमाण पत्र इत्यादि आक्षेपों को लगाकर आवेदन निरस्त किये जा रहे है जिसकी किसी भी स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही है। धरने में हरिकिशन जाट, जितेन्द्र कुमार पासी, रेवन्त राम, ओमप्रकाश कुकणा, भगवाना राम प्रजापत, सीताराम कुम्हार, मुमताज, शकील अहमद पठान, रूघाराम मेघवाल, मोहन छगांणी आदि शामिल हुए।

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