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एमएसएमई दिवस पर नामदेव फिनवेस्ट की पहल: जिम्मेदार ऋण से खुलेगा छोटे उद्यमियों के विकास का रास्ता

छोटे और मझोले उद्यम (MSMEs) देश भर में उद्यमिता, रोजगार सृजन और समावेशी विकास को बढ़ावा देकर भारत के आर्थिक विकास का एक मुख्य आधार बने हुए हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र में 6.3 करोड़ से अधिक इकाइयाँ शामिल हैं। यह क्षेत्र भारत की जीडीपी में लगभग 31.1% और विनिर्माण उत्पादन में 35.4% का योगदान देता है। साथ ही, यह लगभग 32.8 करोड़ लोगों को आजीविका प्रदान करता है, जिससे यह कृषि के बाद देश में रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एमएसएमई क्षेत्र को “उद्यमिता की नर्सरी” बताते हुए इसे विकसित भारत के विजन का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र में ऋण वृद्धि, कुल ऋण वृद्धि की तुलना में अधिक तेज रही है। उन्होंने वित्तीय संस्थानों से अपील की कि वे एमएसएमई को छोटे ऋण लेने वाले ग्राहकों के रूप में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक कारोबारी साझेदार के रूप में देखें। उन्होंने यह भी कहा कि अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क, जल्द आने वाला यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (यूएलआई) और ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ऋण वितरण की प्रक्रिया को अधिक सरल और प्रभावी बना सकते हैं। उनके विचार इस बात को दर्शाते हैं कि जैसे-जैसे एमएसएमई का विस्तार हो रहा है और उनका कारोबार विविध हो रहा है, वैसे-वैसे उनकी वित्तीय जरूरतें केवल कार्यशील पूंजी तक सीमित नहीं रह गई हैं।

एमएसएमई दिवस के अवसर पर, नामदेव फिनवेस्ट इस बात पर जोर देता है कि कैसे सही समय पर और व्यवस्थित वित्त छोटे व्यवसायों को विकास में निवेश करने, तकनीक अपनाने, अपनी स्थिति मजबूत करने और अपनी आकांक्षाओं को स्थायी प्रगति में बदलने में मदद कर सकता है।

बिजनेस की निरंतरता और विकास को सहायता

एमएसएमई के लिए रोजमर्रा के कारोबार को सुचारु रूप से चलाते हुए विकास करना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। समय पर वित्तीय सहायता मिलने से व्यवसाय अपनी कार्यशील पूंजी की जरूरतों, जैसे इन्वेंट्री खरीद, सप्लायरों को भुगतान, कर्मचारियों के खर्च और अन्य परिचालन लागतों को पूरा कर सकते हैं। साथ ही, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, बुनियादी ढांचे में सुधार करने और नए बाजारों में प्रवेश करने जैसे विस्तार कार्य भी संभव हो पाते हैं। विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों के उद्यमियों के लिए सुव्यवस्थित वित्तपोषण आवश्यक नकदी प्रवाह और भरोसा प्रदान करता है, जिससे वे अपने कारोबार को लगातार आगे बढ़ाते हुए नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं और टिकाऊ विकास हासिल कर सकते हैं।

तकनीक और उत्पादकता में निवेश: भविष्य के लिए तैयार उद्यमों का निर्माण

जैसे-जैसे सभी क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, तकनीक, उपकरणों और प्रक्रियाओं में सुधार के लिए निवेश करना एक रणनीतिक आवश्यकता बन गया है। एमएसएमई फाइनेंसिंग से उद्यमियों को बेहतर साधन अपनाने, कार्यकुशलता में सुधार करने, उत्पादकता बढ़ाने और लंबी अवधि की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाने में मदद मिल सकती है।

उभरते बाजारों में उद्यमियों को सक्षम बनाना: ऋण के अंतर को पाटना

टियर-2 और टियर-3 बाजारों में एमएसएमई के पास विकास की बड़ी संभावनाएं होती हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक ऋण प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जिम्मेदार लेंडिंग (ऋण देने की प्रक्रिया) और अनुकूलित ऋण समाधान इन क्षेत्रों के उद्यमियों को अपने व्यवसायों को मजबूत करने और भारत के व्यापक आर्थिक विकास में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने में मदद कर सकते हैं।

इस अवसर पर नामदेव फिनवेस्ट के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एमडी एवं सीईओ) जितेंद्र तंवर ने कहा, “राजस्थान और अन्य राज्यों के टियर-2 और टियर-3 बाजारों में जिन उद्यमियों के साथ हम काम करते हैं, उनके लिए महत्वाकांक्षा और वित्तीय पहुंच के बीच की दूरी हमेशा सबसे बड़ी चुनौती रही है। एमएसएमई दिवस हमें याद दिलाता है कि सही वित्तीय साझेदारी और सकारात्मक सोच के साथ इस अंतर को कम किया जा सकता है। आरबीआई द्वारा एमएसएमई को छोटे ऋण लेने वाले ग्राहकों के बजाय दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देखने की सोच, नामदेव फिनवेस्ट के दृष्टिकोण से पूरी तरह मेल खाती है।

हमारा प्रयास हमेशा उन उद्यमियों की वास्तविक वित्तीय जरूरतों को समझने पर आधारित रहा है, जिन्हें लंबे समय तक औपचारिक ऋण व्यवस्था से पर्याप्त सहायता नहीं मिल सकी। हम ऐसे समाधान विकसित करते हैं जो उनकी जरूरत और परिस्थितियों के अनुरूप हों। हमारा अनुभव बताता है कि जब किसी छोटे व्यवसाय को समय पर और सुव्यवस्थित ऋण मिलता है, तो उसकी औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ाव और मजबूत होता है। अनौपचारिक स्तर पर संघर्ष से औपचारिक और स्थायी विकास की ओर यह बदलाव ही समावेशी वित्त का सबसे प्रभावी उदाहरण है।”

नामदेव फिनवेस्ट के एमएसएमई लोन छोटे कारोबारों की अलग-अलग वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं। इनका उपयोग कार्यशील पूंजी की जरूरत, कारोबार बढ़ाने, नए उपकरण खरीदने और व्यवसाय के संचालन में सुधार जैसे कामों के लिए किया जा सकता है। कंपनी आसान और सुविधाजनक ऋण प्रक्रिया पर जोर देती है। इसके तहत कम दस्तावेज, तेज प्रोसेसिंग, आसान किस्तों में भुगतान की सुविधा और व्यवस्थित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

स्थानीय कारोबार की जरूरतों को समझते हुए नामदेव फिनवेस्ट एमएसएमई को अपना कारोबार मजबूत बनाने, नकदी प्रवाह को बेहतर ढंग से संभालने और लगातार विकास करने में मदद करता है। कंपनी उभरते बाजारों के उद्यमियों का साथ देने और छोटे कारोबारों को मजबूत एवं आत्मनिर्भर बनाने के माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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