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ओरण-गोचर संरक्षण के लिए सामुदायिक सहभागिता जरूरी : बोहरा

बाड़मेर। जिला मुख्यालय से लगभग 18 कि.मी. दूर स्थित राणीगांव में 26 अप्रैल वर्ष 2002 में हुए ऐतिहासिक ओरण बचाओ आन्दोलन की चिरस्मृति में 26 अप्रैल शुक्रवार को राणीगांव फांटा स्थित धर्मपुरीजी की ओरण में हर्ष के साथ ओरण दिवस मनाया गया । जिसको लेकर बलदेवपुरी महाराज के सानिध्य एवं ओरण बचाओ आन्दोलन, बाड़मेर के जिला संयोजक एवं सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश बोहरा अमन के नेतृत्व में ओरण-गोचर संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण संकल्प कार्यक्रम का आयोजन हुआ ।

जिसमें ओरण की पूजा अर्चना व वृक्षों को रक्षा-सूत्र बांधे गये । ओरण बचाओ आन्दोलन से जुड़े जितेन्द्र मंसुरिया ने बताया कि वर्ष 2002 में हुए ऐतिहासिक ओरण बचाओ आन्दोलन की चिरस्मृति में 26 अप्रैल शुक्रवार को राणीगांव में धर्मपुरी की ओरण में ओरण की पूजा-अर्चना कर वृक्षों को रक्षा-सूत्र बांधे तथा आन्दोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया । इस दौरान जहां ओरण की पूजा अर्चना कर ओरएा-गोचर के संवर्द्धन व विकास के लिए विचार-विमर्श किया । कार्यक्रम में ओरण बचाओ आन्दोलन, बाड़मेर के जिला संयोजक एवं सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश बोहरा अमन ने कहा कि जिले भर में लाखों बीघा भू-भाग में फैले ओरण-गोचर क्षेत्रों के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए शासन-प्रशासन के साथ-साथ सामुदायिक सजगकता बहुत ही महत्वपूर्ण है ।

उन्होंनें कहा कि ओरण बचाओ आन्दोलन, बाड़मेर की ओर ये शीघ्र ही जिले में ओरण-गोचर के प्रति जन-जागरूकता अभियान चलाया जायेगा । वहीं ओरण-गोचर क्षेत्रों पर हो रखे अतिक्रमण बेहद ही चिन्ता का विषय है । इस दौरान नरपतसिंह, जितेन्द्र भंसाली, महेन्द्रसिंह महेचा, भीखाराम मेघवाल, जितेन्द्र मंसुरिया, शैतानसिंह, रमेश मंसुरिया, सुरताराम, मोहनलाल, अशोक मेघवाल, नागेन्द्र सिंह, सुमित, पवन कुमार, बाबूलाल वादी, महावीर जैन सहित ओरण बचाओ आन्दोलन से जुडे कई कार्यकर्ता मौजूद रहें।

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