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कवि डॉ. असंगघोष का नेगचार संस्था ने सम्मान किया

बीकानेर, ( ओम एक्सप्रेस)। हिंदी दलित साहित्‍य के महत्त्वपूर्ण कवि डॉ. असंगघोष का नेगचार संस्था द्वारा सम्मान किया गया। भोपाल से पधारे कवि का सम्मान शॉल ओढाकर एवं पुस्तकें भेंट कर किया गया।
लालगढ़ पैलेस में बुधवार को आयोजित इस सम्मान कार्यक्रम के अध्यक्ष साहित्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि असंगघोष कवि के रूप में जाना पहचाना नाम है और इनकी कविताओं में दलित समाज के साथ बदलते भारतीय समाज के सुंदर चित्र देखे जा सकते हैं। यह उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के लंबे सफर में अपनी व्यस्तताओं में भी कविता और कला माध्यमों के लिए उन्होंने अपनी संवेदनाओं को बचाए रखा है।
मुख्य अतिथि कवि-आलोचक डॉ. नीरज दइया कहा कि असंगघोष जी की कविताओं में जिस सहजता-सरलता के साथ मन को छूने वाली संवेदनाओं का वर्णन मिलता है वह दलित कविता धारा में ही नहीं वरन समकालीन कविता में महत्त्वपूर्ण है। आपके कविता संग्रह- खामोश नहीं हूँ मैं, हम गवाही देंगे, मैं दूँगा माकूल जवाब, समय को इतिहास लिखने दो, ईश्‍वर की मौत, हत्‍यारे फिर आएँगे आदि की चयनित कविताओं का संचयन-संपादन सुधीर सक्सेना द्वारा किया गया है, जिसे पढ़कर उनको समग्रता में जाना जा सकता है। दइया ने बताया कि असंगघोष का जन्म मध्य प्रदेश के जावद नामक छोटे से कस्‍बे में दलित परिवार में हुआ था किंतु लंबे संघर्ष के बाद आपने अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं। दलित साहित्य को साहित्य की मुख्य धारा के रूप में चर्चा में लाने का श्रेय जिन कवियों को दिया जाता है उनमें उनका नाम प्रमुख है।

कॉलेज प्राचार्य एवं प्रकाशक डॉ. प्रशांत बिस्सा ने कहा कि असंगघोष प्रशासनिक सेवा में रहते हुए भी साहित्य के प्रति समर्पित हैं। कवि के साथ साथ वे बेहतरीन फोटोग्राफर और पर्यावरण चिंतक हैं । । पक्षियों के प्रति उनका विशेष मोह है और वे देश के विभिन्न अंचलों में घूमकर उनके संरक्षण के लिए सतत सक्रिय हैं । पक्षी विषयक आपका शोध कार्य जल्द ही प्रकाश में आएगा तो इस क्षेत्र को एक नई दिशा मिलेगी।
मरुनगरी में सम्मानित करने के प्रति आभार प्रदर्शित करते हुए कवि असंगघोष ने कहा कि वे मालवा के निवासी हैं और मालवा और राजस्थानी दोनों भाषाएं बहुत करीब की भाषाएं है । इनमें साझा संस्कृति के साथ विपुल शब्द भंडार की परंपरा है। उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कृति के विकास के लिए सरकारों को पर्याप्त ध्यान देना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने अपनी कुछ चुनिंदा कविताओं का भी प्रभावी पाठ किया। श्रीमती असंगघोष ने आभार व्यक्त किया।

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