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कांग्रेस की महारैली सही या भाजपा का हल्ला बोल?

– हेम शर्मा

अगले विधानसभा और लोक सभा चुनावों की राजनीतिक पृष्ठ भूमि अभी से कांग्रेस और भाजपा दोनों तैयार करने में जुट गई है। नए वर्ष से देश के विभिन्न राज्यों में विधानसभा और अगले वर्षों में लोकसभा चुनाव होने है। चाहे राष्ट्रीय कांग्रेस की जयपुर में केंद्र सरकार के खिलाफ महंगाई या अन्य मुद्दों को लेकर महारैली हो या राजस्थान में गहलोत सरकार के खिलाफ हल्ला बोल। उद्देश्य राजनीतिक ताकत दिखाना मात्र है। राजस्थान में अमित शाह ये शुरुआत कर चुके हैं। कांग्रेस इस महारैली के माध्यम से पूरे देश में शक्ति प्रदर्शन का प्रभाव छोड़ना चाहती है। इसमें सोनिया गांधी, प्रियंका और राहुल गांधी समेत पूरी राष्ट्रीय कांग्रेस शामिल रहेगी। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सभी राज्यों को समय पर जीएसटी समेत विभिन्न करों का और सरकारी योजनाओं का पैसा नहीं दे रही है। वहीं रसोई गैस, पेट्रोल डीजल से देश में मंहगाई के हालत बने है। इससे आम लोगों की आजीविका संकट में है। यह भी आरोप है कि मोदी सरकार पूंजीपतियों की समर्थक है। जन कल्याणकारी योजनाएं पूंजीपतियों के हाथों में दे रही है। केंद्र की निजीकरण भविष्य में जनता के लिए भारी पड़ने वाला है। रेल, हवाई सेवाओं का निजीकरण जनहित में नहीं है। वहीं अमित शाह राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार को शाह भ्रष्टाचार में आकंष्ठ डूबी निकम्मी सरकार बताया है। ये आरोप प्रत्यारोप राजनीति नहीं तो क्या है ? यहां जनता की पीड़ा और महंगाई को तो राजनीति करने और जन भावनाओं को अपने अपने पक्ष में भुनाने का आधार बनाया है। जनता जानती राजनीतिक दल तो जनता के नाम पर ही राजनीति करेंगे। चाहे कांग्रेस की महारैली हो या भाजपा का हल्ला बोल। जनता को कुछ राहत नहीं मिलनी है।

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