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केयर हेल्‍थ इंश्‍योरेंस ने लिवर की गंभीर बीमारियों को रोकने के लिए हेपेटाइटिस की शुरुआत में जांच कराने की सलाह दी

वायरल हेपेटाइटिस दुनिया भर में लिवर की बीमारियों और रोकी जा सकने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण बना हुआ है, जिसमें इस बीमारी के वैश्विक बोझ का एक बड़ा हिस्सा भारत में है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस से पहले, केयर हेल्थ इंश्योरेंस ने एक सार्वजनिक सलाह जारी कर लोगों से हेपेटाइटिस की जांच, टीकाकरण और समय पर डॉक्‍टर के पास जाने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।

वायरल हेपेटाइटिस को अक्सर “साइलेंट बीमारी” कहा जाता है, क्योंकि बिना किसी खास लक्षण के यह सालों तक शरीर में फैलती रहती है। ज्यादातर लोगों को इसका पता तब चलता है, जब लिवर को बहुत नुकसान पहुँच चुका होता है। जब तक मरीज डॉक्टर के पास पहुँचते हैं, तब तक बीमारी लिवर सिरोसिस, लिवर फेल होना या लिवर कैंसर जैसी खतरनाक स्थिति में बदल चुकी होती है। इसके बाद इलाज बहुत मुश्किल, लंबा और महंगा हो जाता है। इसलिए बड़ी परेशानियों से बचने और सेहत ठीक रखने के लिए सही समय पर जाँच कराना और इलाज शुरू करना बहुत जरूरी है।

हाल के राष्ट्रीय और वैश्विक स्वास्थ्य आकलनों, साथ ही केयर हेल्थ इंश्योरेंस के दावों के आंकड़ों के अनुसार:

केयर हेल्थ इंश्योरेंस ने बचाव के लिए नीचे दिए गए कुछ तरीकों की सिफारिश की है:

  1. कम से कम एक बार हेपेटाइटिस बी और सी की जांच कराएं, विशेष रूप से यदि आपके लिए इसका जोखिम अधिक है। हेपेटाइटिस बी के पूर्ण टीकाकरण चक्र को पूरा करें, जिसमें नवजात शिशुओं के लिए जन्म के 24 घंटे के भीतर दी जाने वाली खुराक भी शामिल है। लक्षणों का इंतजार न करें, क्योंकि क्रोनिक हेपेटाइटिस सालों तक बिना किसी लक्षण के बना रह सकता है। यदि बीमारी का डायग्नोसिस होता है, तो निर्धारित इलाज पूरा करें, क्योंकि अधिकांश मामलों में हेपेटाइटिस सी का पूरी तरह से इलाज संभव है, जबकि हेपेटाइटिस बी को निरंतर डॉक्‍टरों की देखरेख से प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। मधुमेह, मोटापा, फैटी लिवर या अन्य मेटाबॉलिक स्थितियों से पीड़ित व्यक्तियों को भी अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित रूप से लिवर स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए।
  2. हेपेटाइटिस बी और सी के प्रसार के जोखिम को कम करने के लिए इंजेक्शन, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, दंत चिकित्सा, टैटू बनवाने और पियर्सिंग के दौरान सुरक्षित तरीकों का पालन करें, और रेज़र, सुई या सिरिंज साझा करने से बचें।
  3. हेपेटाइटिस ए और ई से बचने के लिए भोजन और पानी की स्वच्छता बनाए रखें, विशेष रूप से मानसून के मौसम के दौरान जब ये संक्रमण अधिक आम हो जाते हैं।
  4. संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और अत्यधिक शराब के सेवन से बचकर एक स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखें, क्योंकि शराब का अत्यधिक सेवन लिवर की क्षति को तेजी से बढ़ा सकता है।
  5. अपने हेल्‍थ इंश्‍योरेंस कवरेज की नियमित रूप से समीक्षा करें। लिवर के उन्‍नत उपचार और ट्रांसप्लांट पर लाखों रुपये का खर्च आता है, ऐसे में पर्याप्त हेल्‍थ इंश्‍योरेंस आपको गंभीर बीमारियों के वित्तीय बोझ से सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।

केयर हेल्थ इंश्योरेंस प्रिवेंटिव हेल्थ के प्रति जागरूकता बढ़ाने और शुरुआती कदम उठाने को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। चूंकि भारत 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है, इसलिए लिवर रोग के बोझ को कम करने के लिए अधिक जागरूकता, नियमित जांच और शुरुआती इलाज बेहद महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

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