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कोरोना वायरसः मुंबई में किराएदार तनाव में, कहां से किराया देंगे, कहां से घर खर्च लाएंगे?

मुंबई/प्रदीप द्विवेदी, कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र के मुंबई सहित चार शहरों में लॉकडाउन का फैसला लिया गया है।

खबर है कि मुंबई समेत इन चार शहरों में 31 मार्च 2020 तक सभी दफ्तर और दुकानें बंद रहेंगी. याद रहे, राज्य में कोरोना वायरस के अब तक पचास से ज्यादा मामले सामने आए हैं।

इस माहौल में सबसे ज्यादा परेशान मुंबई में रहने वाले किराएदार हैं. उनका सारा कामकाज थम-सा गया है और ऐसी स्थिति में वे कहां से तो किराया देंगे और कहां से घर खर्च लाएंगे, यह सवाल तनाव बढ़ाता जा रहा है।

मुंबई में औसतन किराया पैतीस हजार तक है, लिहाजा बगैर बचत के घर चलाने के लिए प्रतिमाह कम-से-कम पचास हजार रुपए की जरूरत रहती है. यदि एक माह का अर्थचक्र भी गड़बड़ा गया तो घर का बजट सही होने में महीनों लग जाएंगे. उन्हें यह डर भी सता रहा है कि यदि किराया नहीं दिया तो उन्हें घर खाली करना पड़ सकता है और ऐसी स्थिति में वे कहां जाएंगे? जिनके पास किराए की दुकानें हैं, उनके सामने तो दोहरी समस्या है

इसके अलावा लोन ईएमआई, पीडीसी, चेक बाउंस होने पर कानूनी कार्रवाई, बैंक में मिनीमम बैलेंस नहीं होने पर पेनल्टी जैसे तनाव भी कम नहीं हैं।

केन्द्र सरकार को बैंकों को निर्देश देना चाहिए कि जब तक हालात नियंत्रण में नहीं आ जाते हैं तब तक के लिए हर तरह की पेनल्टी हटा दी जाए ताकि लोग अपने पैसों का उपयोग कर सकें।

किसी भी देश की सरकार यदि लोगों से इंकम टैक्स सहित विभिन्न टैक्स लेती है तो उसका नैतिक दायित्व है कि संकट के ऐसे मौके पर वह लोगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करे।

केन्द्र सरकार को राज्य सरकारों के सहयोग से इस मुद्दे पर आवश्यक निर्णय लेकर किराएदारों सहित अन्य लोगों के लिए सुरक्षात्मक कदम उठाने चाहिए!

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