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गहलोत की अब मोदी से छेड़खानी हेम शर्मा

अशोक गहलोत कांग्रेस के भीतर के द्वंद से अब निजात पा चुके हैं? बीकानेर में गहलोत प्रदेश में हेपीनेंस इंडेक्स ढूढते जान पड़े। अपने अतीत में गए। रुख नरम रहा है। गहलोत ने मंच से बीकानेर में बनाए नए केनवास में सचिन पायलट, पार्टी विवाद, भाजपा को जगह नहीं दी। नरेंद्र मोदी छाए रहे। पूरे भाषण में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजनीतिक अठखेलियों करते लगे। गहलोत इस कार्यकाल में पूरे समय सत्ता में चुनौतियों से जूझते रहे। कई पासे फेंके। उनका एक भी पासा उल्टा नहीं पड़ा। मात नहीं खाई। चाहे वेणु गोपाल का सचिन के साथ ताजा करवाया राजीनाम हो या राष्ट्रीय कांग्रेस के निर्देश। गहलोत ने बदली व्यूह रचना में नया पास फेंका है। बीकानेर में कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गंभीर होना चाहिए कि 9 लाख 46 हजार भारतीय देश की नागरिकता छोड़ चुके। ये देश के बड़े उद्यमी ही होंगे। मोदी जी को चिंता होनी चाहिए कि देश में पूंजी निवेश बढ़े। राजस्थान सरकार ने 11 हजार करोड़ के विनिवेश के एमओयू किए है। इसमें से 10 हजार करोड़ के एमओयू फलीभूत हो ऐसा आकलन है। 30 _40 प्रतिशत भी हो जाए तो प्रयास सफल माना जाएगा। गुजरात में मोदी जब मुख्यमंत्री थे तब 20 _25 प्रतिशत एमओयू फलीभूत होते। पुरानी पेंशन योजना के लिए नीति आयोग ने वक्तव्य दिया। उचित नहीं है तो एक्जामिन करवा ले। मैं बीकानेर के इस मंच से पांच योजनाएं केंद्र के स्तर पर लागू करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग करता हूं। चिरंजीवी योजना, शहरी रोजगार गारंटी योजना, सामाजिक सुरक्षा, वृद्धावस्था पेंशन योजना, उड़ान योजना। महंगाई और बेरोजगारी से तो परिवार गरीब बनते हैं। गरीब बढ़ाने से देश का उत्थान कैसे होगा? यह राजनीतिक खेल है जो गहलोत कांग्रेस के भीतर और विरोधियों के साथ खेलते रहते है। ग्रामीण ओलंपिक से भी बड़े गेमचेंजर गहलोत बीकानेर में दिखाए दिए।

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