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गहलोत लोकतंत्र में समर्थ नेता -गहलोत का राजनीति में सिक्कजमा

– हेम शर्मा राष्ट्रीय

कांग्रेस की गिरती साख पर अब फुलस्टाप लग गया है। कांग्रेस के भीतर सत्ता पाने के विवाद के सिलसिले भी अब थम जाने है। अशोक गहलोत का कांग्रेस और सभी तरह के विरोधियों में ही नहीं बल्कि भारतीय राजनीति में सिक्का जम गया है। राष्ट्रीय कांग्रेस का ग्राफ रसातल में जाने के बाद फिर से उठना शुरू हो गया है। यकीनन राजस्थान और राष्ट्रीय राजनीति के समीकरण बदल गए हैं। सचिन पायलट सबक सीखने के अलावा ज्यादा हासिल नहीं कर पाए हैं। इतना जरूर है कि कांग्रेस में विद्रोही होने के बात प्रतिष्ठा के साथ पुन: कांग्रेस के हो गए हैं। गहलोत_ सचिन विवाद के सुखद अंत के बाद राजनीति में गहलोत का कद और बढ़ गया है। गहलोत मंत्रिमंडल के पुर्नगठन में उप चुनाव में कांग्रेस की जीत का सिक्का ही नहीं अगले चुनाव की प्रभावी व्यूह रचना शामिल है। पूरे 30 मंत्रियों का मंत्रिमंडल होना ही था। 12 केबिनेट और 4 राज्यमंत्रियों की शपथ के साथ पूरा हुआ। गहलोत ने जो चाहा जैसा चाह पूरा हुआ। मुख्यमंत्री के सलाहकार सात विधायक यकीन केबिनेट मंत्री से कम पावर फूल नहीं होंगे। राजस्थान में मंत्रिमंडल के पुनर्गठन और राजनीतिक नियुक्तियों से कांग्रेस की जड़ें मजबूत हुई है। बीकानेर में तीन मंत्रियों से कांग्रेस की मजबूती का स्कोर अब बीकानेर में छूना पाना भाजपा के लिए बड़ा चैलेंज है। कुछ भी कहो पक्ष विपक्ष, विरोधी समर्थक मन में तो जानते ही है गहलोत लोकतंत्र में सभी विरोधाभास और विडम्बनाओं के बीच समर्थ नेता है।

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