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गोचर, ओरण, पायतन, आगोर बचाओ राष्ट्रीय अभियान की दस्तक

बीकानेर, हेम शर्मा। पुन्यानंद जी आश्रम शरह नत्थानियान् गोचर में देवी सिंह भाटी ने राज्य स्तरीय गोचर, ओरण आगोर बचाओ बैनर का विमोचन किया गया। इसी स्थल से सरेह नथानिया गोचर की 27 हजार बीघा में चार दिवारी का काम हुआ। यहीं से राजस्थान से गोचर, ओरण जोहड़ पायतन और आगोर बचाओ अभियान एक वर्ष पहले शुरू किया गया था। अब राष्ट्रीय अभियान की व्यूह रचना पर काम किया जा रहा है। राजकोट में हुए गो टेक 2023 ग्लोबल कनफरडेशन ऑफ काऊ बेस इंडस्ट्री एक्सपो में माना गया कि राजस्थान में गोचर, ओरण जोहड़ पायतन और आगोर बचाओ अभियान सराहनीय कदम है। अभियान देशव्यापी बने इसके लिए राजस्थान गो सेवा परिषद ने देवी सिंह भाटी के सफल नेतृत्व चले रहे अभियान से देश भर के लोगों को अवगत भी करवाया। 11 जून का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन राष्ट्रीय स्तर पर गोचर, ओरण जोहड़ पायतन और आगोर बचाओ राष्ट्रीय अभियान के लिए मील का पत्थर साबित होना है। इस सम्मेलन के प्रस्ताव भारत सरकार, प्रधानमंत्री और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भेजे जाने है। जगत सिंह करनोत ओरण गोचर संरक्षक प्रांत प्रमुख जोधपुर का कहना है कि वैसे भू-माफिया की नज़र देव भूमि औरण गौचर नाडी तालाब आगोर पायतान की जमीन पर हैं ये ज़मीन हमारी आस्था से जुड़ी है गायों के हक हक की देवभूमि हैं, जंगली जानवरों व पक्षियों के स्वच्छंद विचरण की ज़मीन है, हमारे पूर्वजों ने हमेशा देव भूमि को सुरक्षित करने का प्रयास किया। ,हर वर्ष गांव गांव में तालाब देवस्थान,कुआ बावड़ी नाडी पर हवन-यज्ञ करते उन स्थानों के सार सम्भाल के प्रयास करते, वैशाख मास में इन औरण गौचर भूमि पर लगे बड़ पीपल की पूजा कर पानी पिलाने का कार्य करते। गांव के लोग वैशाख पूर्णिमा को पूरे गांव की औरण की परिक्रमा करते सभी चराचर जगत के जीवों के संरक्षण का संकल्प लेकर कार्य करते ।
औरण भूमि पर पौधारोपण चारागाह विकास के लिए प्रयास करते लेकिन चालीस पचास साल का एक आपाधापी का युग ऐसा आया हम हमारी सनातन परम्परा को भूलते जा रहे हैं।
टीम ओरण जैसलमेर के मुताबिक जैसलमेर के हर गांव में ओरण है जो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नही होने के कारण ओरणों का विनाश हो रहा है।. सौर एवं पवन ऊर्जा कम्पनियों को ओरणों का आवंटन हो रहा है। ओरणों में नदी और नालों का निर्माण होता है जो हमारे तालाबों और कुओं को जल देते है। मानव जीवन – वन्यजीवों का जीवन और पालतू पशुधन का जीवन इन्ही ओरणों पर निर्भर है। ये जमीनें देवी – देवताओं व जुंझारों – सतियों के नाम से ओरण घोषित की लेकिन आजादी के बाद राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं करवाने के कारण सरकार इन जमीनों की मालिक बन बैठी है और ओरणों के विनाश पर तुली है। गोचर ओरणों को उजाड़ कर सरकारें अपने हित साध रही है। राजस्थान के हर जिले में गोचर, ओरण, जोहड़ पायतान और आगोर की भूमि सुरक्षित रखने का प्रयास चल रहा है। अब यह पूरे राज्य का समन्वित प्रयास और सामूहिक आंदोलन बन सकेगा। 11 जून को बीकानेर में प्रस्तावित राज्य स्तरीय सम्मेलन को राष्ट्रीय आंदोलन का मंच बनाया जा रहा है। आप सभी सहभागी बने।

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