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चरम पर पहुंच चुका भ्रष्टाचार


रिश्वतखोरी के खिलाफ अब आपको आवाज उठानी होगी
भारत एक विकासशील देश है और बढ़ती जनसंख्या को देखकर यहा निरंतर शहरों का विस्तार हो रहा है, नए निर्माण दूद्र गती  से चल रहे हैं। हर व्यक्ति की आवश्यकता को देखकर टाउनशिप, फैक्ट्रियां, व्यापार सभी कुछ बड़े पैमाने पर बड़े प्रोजेक्ट की स्वीकृति टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और खास करके बिजली विभाग, रेवेन्यू , बैंक, शासकीय कमेटिया से लेकर कई विभागों से अनुमतिया लेना पड़ती है। जहा बड़ी भारी मात्रा में रिश्वत देने के बाद ही स्वीकृति होती है अन्यथा आप के केस बहुत लंबित हो जाते हैं कानून की गलियों में आपको उलझा देते हैं और उसको साबित करने के लिए आप मुश्किल में पड़ जाते हैं। शिकायत करें भी तो उसके लिए प्रूफ इकट्ठा करना पड़ता है कि उन्होंने रिश्वत मांगी और ये सब चालाकी से रिश्वत मांगते हैं कि आपको सबूत इकट्ठा करना भारी पड़ जाता है। ऐसा नहीं है कि यहां न्याय नहीं मिलता परंतु जो खिलाफ आवाज उठाएं उसे कोर्ट कचहरी और न्याय पाने में बहुत समय लग जाता है। रिश्वतखोरी का हाल अमूमन हर विभाग में सरेआम सबको मालूम है खुल कर आम जनता को मालूम है पर सिर्फ विजिलेंस जांच एजेंसी इकोनॉमिक सेल और शासन प्रशासन को नहीं मालूम। ईमानदार नेता और शासन-प्रशासन जनता हित में कई नियम बनाते हैं परंतु रिश्वतखोर उसकी धज्जियां उड़ा देते हैं
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

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