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जनता द्वारा जनता के लिए जनता का शासन: महालोकतंत्र- न्यायधर्मसभा

हरिद्वार। जैसा कि आप सभी जानतें हैं कि किसी भी राजनैतिक दल की सरकार अब तक जनता को निःशुल्क शिक्षा, निःशुल्क रोजगार,निःशुल्क सुविधा तथा निःशुल्क संरक्षण जैसे जन्मसिद्ध अधिकारों को सुलभ कराने में असमर्थ रही हैं ।
न्यायधर्मसभा के संस्थापक एवं 111 न्यायप्रस्तावों के जनक परम पूज्य श्री अरविंद अंकुर जी ने सन 2011 से केंद्र सरकार तथा सभी राज्यसरकारों को समस्याओं से निदान के लिए मार्गदर्शन करते आ रहे हैं ।
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी चन्द्रसेन शर्मा जी ने बताया कि न्यायधर्मसभा के 111 न्यायप्रस्ताव अद्भुत है। अगर सरकार इन्हें लागू कर देती है तो व्यवस्थागत सभी समस्याएं मात्र एकदिन में समाप्त हो सकती हैं ।
अभी तक जनता को राजनैतिक न्याय भी नहीं मिला है। अभी लोकतंत्र में केवल जनता को चुनने का एकमात्र अधिकार है जबकि जनता को द्वादश अधिकार सुलभ होने चाहिए । जिसमें शासन सत्ता के लिए 12 वोटिंग पावर तथा शासन व्यवस्था के लिए 12 वीटो पावर है । ऐसा होने पर जनता स्वतः अपने अधिकार प्राप्त कर लेगी । प्रस्ताव नंबर 53 महालोकतंत्र ही न्यायधर्मसभा का घोषणापत्र है । अगर केंद्र सरकार इसे लागू नहीं करती है तो न्यायधर्मसभा स्वम जनता द्वारा,जनता के लिए पहले दिन सत्ता में आते ही लागू करेगी । देश की सभी पावर जनता के हाथों में होगी । नियम,नीति,निर्णय पारित और खारिज करने का अधिकार जनता को होगा ।

*NDS द्वारा प्रस्तावित न्यायशील महालोकतंत्र के प्रभाव-*
1. व्यक्तितंत्र, वंशतंत्र, दलतंत्र पूर्णतः समाप्त हो जाएगा।
2. लोकतंत्र वास्तविक हो जाएगा।
3. “जनता का, जनता के लिये, जनता के द्वारा” यह लोकतंत्र की शुद्ध परिभाषा पूर्णतः प्रतिष्ठित हो जाएगी।
4.तानाशाही पूर्णतः समाप्त हो जाएगी।
5. शासन में दुर्जनों, अपराधियों का प्रवेश पूर्णतः रुक जाएगा।
6. शासन द्वारा जनता के शोषण की समस्त संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी।
7. प्रत्येक नागरिक को वीटो पावर प्राप्त होने के कारण अल्पसंख्यक के हित सदैव सुरक्षित हो जाएंगे।
8. जनहित के विरुद्ध कोई भी कार्य करना असंभव हो जाएगा।
9.पुलिस की गाली-गलौज और दुष्ट छवि समाप्त हो जाएगी।
10.राजनीति पर पुती हुई कालिख पूर्णतः धुल जाएगी।
11. राजनेताओं और प्रशासकों के प्रति लोग आदर से भर जाएंगे।
12. सत्ताधारी केवल गाइड की भूमिका निभा सकेंगे उनका तांडव नर्तन समाप्त हो जाएगा।
13. अपात्र लोग उच्च सरकारी पदों पर जाने को इच्छुक नहीं रह जाएंगे।
14. सत्ताधीश अपने कर्तव्य से बिल्कुल भी विमुख नहीं हो पाएंगे।
15. लोकसभा तो सामाजिक संसद बन जाएगी।
16. सैकड़ों सरकारी टैक्स पूर्णतः समाप्त हो जाएंगे, केवल एक राजस्व शेष रहेगा।
17. RBI की रेपो रेट शून्य हो जाएगी। सरकारी ब्याजखोरी समाप्त हो जाएगी।
18. करेंसी स्वतः डिजीटल हो जाएगी।
19. सम्पूर्ण राजकोष का जनहित में सदुपयोग होने लगेगा। दुरुपयोग असंभव हो जाएगा।
20. वसुधैव कुटुम्बकम चरितार्थ होने लगेगा।
21. युद्ध, आतंक, अपराध, हड़ताल, धरना, विरोध, क्रांति, आक्रमण, लूट भ्रष्टाचार, जातिवाद, गरीबी पूर्णतः समाप्त जाएंगे।
22. अशिक्षा, बेरोजगारी, असुविधा, असुरक्षा पूर्णतः समाप्त हो जाएंगे।
23. जनता को चारों जनाधिकार (शिक्षा, रोजगार, सुविधा, संरक्षण) इत्यादि स्वतः सुलभ होने लगेंगे।
24.भारतीय संविधान की उद्देशिका में वर्णित राजनैतिक न्याय स्वतः स्थापित हो जाएगा।

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