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जनसंख्या रोकथाम के लिए राष्ट्रीय नियामक आयोग बने: डाॅ. कुसुम

जयपुर, । मुक्त मंच की 64वीं गोष्ठी ‘‘बढ़ती हुई आबादी: चुनौतियां और समाधान‘‘ विषय पर हुई जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ नरेंद्र शर्मा कुसुम ने की और जोधपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो प्रवीण चंद्र त्रिवेदी मुख्य अतिथि थे। परम विदुषी डॉ. पुष्पलता गर्ग का सानिध्य रहा। शब्द संसार के अध्यक्ष श्री श्रीकृष्ण शर्मा ने संयोजन किया।
डॉ नरेंद्र शर्मा कुसुम ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि जिस अनुपात में जनसंख्या बढ़ रही है, उस अनुपात में संसाधन नहीं बढ़ रहे हैं। इसलिए आर्थिक असमानता की खाई चुनौती बनी हुई है। इसके समाधान के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या नियामक आयोग का गठन होना चाहिए।
जोधपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो प्रवीण चंद त्रिवेदी ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में माल्थस के जनसंख्या सिद्धांत का विवेचन करते हुए कहा कि जनसंख्या वृद्धि और संसाधनों में संतुलन होने से ही बेरोजगारी, बेकारी, भुखमरी और स्वास्थ्य समस्याओं का निराकरण हो सकेगा। इसी से ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन रोका जा सकेगा।
डांग क्षेत्र विकास आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ सत्यनारायण सिंह ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारी कोई जनसंख्या नीति नहीं है। इसलिए सुविचार कर जनसंख्या नीति बनाई जानी चाहिए।
आईएएस (रि) आरसी जैन ने कहा कि निर्धारित सीमा से अधिक बच्चों के जन्म पर निःशुल्क राशन और अन्य सुविधाओं पर अंकुश लगना चाहिए तभी जनसंख्या की समस्या हल हो सकेगी।
ख्यातनाम व्यंग्यकार एवं कवि फारूक आफरीदी ने कहा कि जनसंख्या विस्फोट रोकने के लिए लोक शिक्षण और शिक्षा का विकास आवश्यक है। अशिक्षा और पिछड़ेपन के कारण यह समस्या विकराल रूप ले रही है।
पूर्व आईएएस अरुण ओझा ने कहा कि हम तो ‘वीर भोग्या वसुंधरा‘ में विश्वास रखते हैं इसलिए संसाधनों के न्यायोचित उपयोग और सही वितरण से ही इस समस्या का समाधान संभव है।
राज्यपाल के विशेषाधिकारी ज्ञानचंद जैन का मानना था कि आबादी पर नियंत्रण के लिए जरूरी है कि दो से अधिक संतानों पर मताधिकार से वंचित किया जाए। प्रखर विचारक पत्रकार सुधांशु मिश्रा ने कहा कि अर्थव्यवस्था समावेशी और योजनाबद्ध हो। सŸाा जहां लोक कल्याणकारी होनी चाहिए वहां वह धन केंद्रित और धनाढ्यों की सेवा में लगी रहती है।
वरिष्ठ वित्तीय सलाहकार एवं उपन्यासकार आरके शर्मा ने कहा कि संजय गांधी के इस दिशा में प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहिए। अपने संयोजकीय वक्तव्य में श्रीकृष्ण शर्मा ने आबादी के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा कि बढ़ती आबादी के कारण बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार, अराजकता आदि समस्याएं पनप रही हैं। शिक्षा ही इस समस्या से निजात दिला सकती है।
इस अवसर पर प्रमुख स्तंभकार ललित अकिंचन और पत्रकार अजीत तिवारी ने भी विचार व्यक्त किए। विष्णु लाल शर्मा आईएएस (रि.) ने आभार व्यक्त किया।

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