Site icon OmExpress

जब सांसद और विधायक एक बार चुनने के बाद पेंशन के हकदार है तो कर्मचारी क्योंं नहीं – दुष्यंत चौटाला

– कर्मचारियों को पुरानी पेंशन और ग्रामीण युवकों को नौकरियों में 10 अंकों की देंगे सौगात
– किसी कच्चे कर्मचारी की नहीं जाएगी नौकरी
जींद। जननायक जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं उचाना से प्रत्याशी दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि सरकारी कर्मचारी जीवन भर अपने पद रहते हुए जनता की सेवा करता है पर अफसोस की बात यह है कि वह पेंशन का हकदार नहीं है जबकि विधायक अथवा सांसद एक बार चुन लिया जाए तो वह पेंशन का हकदार हो जाता है।

उन्होंने कहा कि यह सरकारी कर्मचारियों के साथ न केवल अन्याय है बल्कि उसके आत्सम्मान पर भी ठेस है। दुष्यंत चौटाला ने वादा करते हुए कहा कि प्रदेश में जनसमर्थन से जेजेपी की सरकार बनने पर सरकारी कर्मचारियों के आत्मसम्मान को बढ़ावा देते हुए पुरानी पेंशन स्कीम पहली कलम से बहाल की जाएगी और पंजाब के समान वेतनमान दिया जाएगा।
जेजेपी प्रत्याशी ने कहा कि सत्ता में आने पर सरकारी कर्मचारियों को वे तमाम सुविधाएं दी जाएंगी, जिसके वे हकदार हैं। उन्होंने विश्वास दिलवाया कि प्रदेश में किसी भी कच्चे कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी चाहे वह किसी भी विभाग में कार्यरत हो। हर हालत में उनकी नौकरी सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सात दशक बाद भी प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। एक ओर जहां सरकारी स्कूलों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति व पंखे न होने के कारण पेड़ों की छांव में पढ़ाई करने को मजबूर हैं वहीं दूसरी ओर गांवों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को शहरों के मुकाबले अन्य आधारभूत सुविधाओं की भरी कमी से झेलना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के समान अवसर प्रदान करने की दृष्टि से जेजेपी की सरकार बनने पर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को नौकरियों में 10 अंकों का अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा। सरकारी नौकरियों व प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन के लिए बेरोजगारों से वर्ष में केवल एक बार 100 रूपये फीस ली जाएगी और उनके परीक्षा केंद्र गृह जिलों में स्थापित होंगे।

दुष्यंत चौटाला नरवाना व उचाना हलके में ग्रामीणों से रूबरू हो रहे थे। जेजेपी नेता दुष्यंत ने कहा कि भाजपा ने युवाओं, किसानों, व्यापारियों और गरीबों को झूठे सपने दिखाए हैं। मोदी के राज में देश की अर्थ व्यवस्था का बंटाधार हो गया। युवाओं का रोजगार छीन गया।
उन्होंने कहा कि न तो नोटबंदी देश के काम आई और न ही जीएसटी का देश की अर्थयवस्था को गति दे सकी। कृषि क्षेत्र सहित बड़ी-बड़ी कंपनियों का उत्पादन घट गया, लाखों युवा बेरोजगार हो कर सड़कों पर आ गए। सपनों के सौदागर प्रधानमंत्री मोदी देश के आर्थिक मुद्दे पर पूरी तरह से असफल साबित हुए हैं।

दुष्यंत चौटाला ने देश की मंदी के लिए कृषि क्षेत्र की उपेक्षा को जिम्मेवार बताते हुए कहा कि देश सिर्फ अच्छे भाषणों और सुनहरे सपनेे दिखाने से नहीं चलता बल्कि आर्थिक नीतियों को समय की नजाकत के अनुसार लागू करने, कृषि क्षेत्र को साथ लेकर चलने, बेरोजगारेां केलिए रोजगार का प्रबंधन करने से आगे बढ़ता है।

Exit mobile version