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जल भराव की समस्या से जूझ रहा गांव गुर्जा वासुदेव

प्रधान से लेकर डीएम तक की अनेकों बार शिकायतें नहीं हुआ समस्या का समाधान

एक दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे अधिकारी ग्रामीणों को हो रही परेशानी

पिनाहट वैसे तो सरकारें विकास के लाख दावे करती है लेकिन जब नजर धरातल पर पड़ती है तो सरकार के दावों की पोल खुलती ही नजर आती है चुनावी दौरों में तो जनप्रतिनिधि जनता के साथ कंधा से कंधा मिला ए खड़े नजर आते हैं लेकिन चुनावी दंगल जीत का सेहरा बांध कर बरसाती मेंढक की तरह विलुप्त हो जाते हैं अब इसे भोली-भाली जनता का भाग्य कहे या दुर्भाग्य विवश होकर जनप्रतिनिधि से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की चौखट पर चक्कर काटते काटते चप्पले तक घिस जाती हैं न जाने क्यों जिम्मेदार कुंडली मारे बैठे रहते हैं ग्रामीणों की समस्याएं सुरसा की तरह मुंह फैलाए बैठी है लेकिन इसे ना जनप्रतिनिधि देखते और ना ही अधिकारी ऐसा ही मामला पिनाहट क्षेत्र की ग्राम पंचायत पिनाहट के गांव गुर्जा वासुदेव का प्रकाश में आया है
पिनाहट के निकटवर्ती ग्राम गुर्जा वासुदेव मजरा खेड़ा बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। गांव के मुख्य मार्ग सहित अधिकांश नाली विहीन कच्ची गलियों में भरे बारिश के पानी और कीचड़ से होकर निकलना ग्रामीणों की मजबूरी बन गयी है। हालांकि यह समस्या पुरानी है।

ग्राम गुर्जा वासुदेव वासी वर्षो से जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। जल निकासी के अभाव में बारिश के दिनों में पूरा गांव टापू बन जाता है। जिससे आवागमन के सभी मार्ग बंद हो जाने से पैदल व दुपहिया वाहन सवारों का निकलना दूभर हो जाता है। गांव के दो प्राथमिक स्कूलों के जलमग्न होने से बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया है।
ग्रामवासी हजारीलाल लीलाधर का कहना था कि गांव में जल भराव की समस्या वर्षो पुरानी है। ग्राम प्रधान जल निकासी के लिए गांव में बरसाती नाले का निर्माण नहीं करा रहे हैं। जब भी ग्रामवासी मांग करते हैं तो चुनावी रंजिश मानते हुए काम कराने से मना कर देते हैं।
भजन लाल ने बताया कि स्कूल के आसपास और गलियों में गंदा पानी भरने से बरसात के मौसम में बच्चे स्कूल जाना ही बंद कर देते हैं। जिससे उनकी पढ़ाई का नुकसान होता है।

गनीमत है कि लॉक डाउन के चलते अभी स्कूल बंद है
ग्रामवासी मेघ सिंह परसराम गंगाराम क्षदामी लाल भजन लाल ने का कहना है कि अपनी समस्या को लेकर ग्राम प्रधान खंड विकास अधिकारी से से लेकर डीएम तक ग्रामीणों ने मिलकर गांव की गलियों में इंटरलाक व नालियों के निर्माण की मांग को लेकर फरियाद कर चुके हैं मगर कोई सुनवाई नहीं हुई है। राजेश ने बताया कि बारिश के दिनों में गांव के आवागमन के सभी रास्ते बंद होने से लोगों का जीना दूभर हो जाता है। ग्रामीणों की समस्या के समाधान की जगह अधिकारी जनप्रतिनिधि एक दूसरे पर पल्ला झाड़ ग्रामीणों को नारकीय जीवन जीने को विवश कर रहे हैं जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण ही सरकार के स्वच्छता अभियान को पलीता लग रहा है।

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