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“जहां जरा भी अहंकार वहां भगवान नहीं” – संत दिग्विजय रामजी


जयपुर,।बिरला मंदिर में हो रही श्रीमद भागवत कथा महोत्सव के छठे दिवस अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय रामद्वारा चितौड़गढ़ के संत रमता राम महाराज के शिष्य कथा वाचक व्यासपीठ अलंकृत संत दिग्विजय रामजी महाराज ने श्रोताओं को कहा कि जहां रूप, धन, पद या शक्ति इनमें से कोई सा भी अहंकार होता है उस काया में, उस घर में भगवान नही बिराजते भगवान वहां विराजते है जहां भाव भक्ति होती है अतः अहंकार किसी का कभी ना करना।

भागवत कथा महोत्सव के श्रीमद् समन्वयक आध्यात्मिक वक्ता एवं लेखक योगी मनीष भाई विजयवर्गीय ने बताया कि कथा के छठे दिवस के मुख्य प्रसंग उद्धव चरित्र व रुकमणी विवाह के अवसर पर कथा महोत्सव आयोजक राकेश कुमार, मुकेश कुमार विजयवर्गीय थली वाला परिवार के सदस्यों ने जीवंत किया तो कथा स्थल श्रीमन नारायण नारायण नारायण से गुंजायमान हो गया, रुक्मणी विवाह पर शंख ध्वनि के बीच सैकड़ों भक्त झूम कर नाचे पुष्प वर्षा करते हुए द्वारिकाधीश के जयकारे गुंजायमान हुए।

व्यासपीठ अलंकृत संत दिग्विजय रामजी महाराज ने कथा श्रवण के लिए इंदौर से पधारे वरिष्ठ समाज सेवी विजय कुमार विजयवर्गीय, कोटा से पधारे अखिल भारतीय विजयवर्गीय वैश्य महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री रामबाबू विजयवर्गीय एवम अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन राजस्थान के प्रभारी ध्रुवदास अग्रवाल को दुपट्टा पहना कर आशीर्वाद प्रदान किया। अतिथियों का अभिनंदन आयोजक परिवार के मुखिया मदनलाल, राकेश कुमार विजयवर्गीय थली वाले (मुख्य संरक्षक एवम् पूर्व महासभा अध्यक्ष अखिल भारतीय विजयवर्गीय वैश्य महासभा) मुकेश, सपना, विनोद, आरती विजयवर्गीय ने किया।

आयोजक थली वाला परिवार सहित अंतराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन जयपुर विंग के अध्यक्ष सुधीर गोधा, महामंत्री सीए संजय पाबूवाल, प्रदेश युवा विंग के पदाधिकारी एंकर अंकित खंडेलवाल, सौरभ पाटोदिया, कार्यकारी अध्यक्ष योगी मनीष भाई विजयवर्गीय, विजय वर्गीय महासभा के महेश रामस्नेही महेश कौथून, कमलेश विजयवर्गीय डोडवाड़ी एवं सैकड़ों धर्म प्रेमियों ने 501 दीपको से भागवत भगवान की सामूहिक महाआरती की।

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