
कब जागेगा राष्ट्र के प्रति दायित्व का भाव ?, आओ स्वयं से शुरूआत करें
दुनियाभर के तमाम देश एक निश्चित नीति-नियमों एवं कानून-कायदों से ही चलते हैं । भारत भी उसी परिधि में आता है । जहां पर कानून का राज सर्वोपरि है । राष्ट्र के संचालन के लिए अनेक प्रकार के विस्तृत कानून एवं नियम बने हुए हैं । जिसका पालन प्रत्येक नागरिक का सर्वोच्च दायित्व है । इन कानूनों का उल्लंघन अपराध की श्रेणी में आता है । कानूनों की पालना का अस्तित्व नागरिकों पर निर्भर रहता है । शासन, प्रशासन, यातायात, खनन, आबकारी, शिक्षा, पर्यावरण, प्रकृति आदि-आदि को लेकर कई प्रभावी कानून-कायदे और नीति-नियम निर्धारित किए हुए है । जिसे हम नागरिक जानते भी है और जानना भी चाहिए । कानून अथवा नियमों की जानकारी होने के बाद भी हम प्रमादवश या स्वार्थवश पालना नहीं करते हैं । हम जानते सब हैं परंतु मानते नहीं है, ऐसा चलन हमारी आम जिंदगी के गहरे में बैठ गया है । सत्ता की धौंस व प्रशासन के लचर रवैये ने हमारी सार्वजनिक आदतों को और अधिक बिगड़ने का काम किया है । उदाहरण के तौर पर हम यातायात नियमों की बात करें तो प्रतिदिन हम स्वयं कई बार यातायात नियमों को तोड़ते नजर आते है ।
ऐसा नहीं है कि हमें यातायात नियमों की जानकारी नहीं है बल्कि हम जानते हुए भी उन नियमों को मानते नहीं है । दैनिक जीवनचर्या में शिद्दत के साथ शामिल नहीं करते हैं । इसी प्रकार हम अपनी दिनचर्या में सुबह से लेकर शाम तक कई अवसरों पर आंख बंद कर नियमों व कानूनों की अवहेलना करते नजर आते हैं । ऐसे ही तमाम विभागों के नियमों, कार्यों आदि में हम मतिमूढ़ होकर या प्रयोजित तरीके से क़ानूनों व नियमों की धज्जियां उड़ाते शर्म तक महसूस नही करते है । किसी राष्ट्र के विकास व उसके चरित्र निर्माण का मूल व नींव उसके नागरिक होते हैं । जैसा चरित्र नागरिकों का होता है वैसा ही उस राष्ट्र का चरित्र बनता जाता है ।
इसी भांति हम अपने-अपने धर्म क्षेत्र में भी आगे बढ़ते जा रहे हैं अर्थात अपने-अपने धर्म गुरु, महापुरुषों आदि के उपदेशों, प्रवचनों एवं शिक्षाओं के बारे में जानकारी तो दुनिया भर की रखते हैं परंतु उन सद् शिक्षाओं को मानने और अपनाने के मामले में आज भी कई कोसों दूर है । आज हमें अच्छी शिक्षाओं को जानने के साथ-साथ मानने की महती जरूरत है अर्थात अच्छी शिक्षाओं को मात्र जानने से नहीं बल्कि उनको जीवन में मानने व उतारने से ही हमारा जीवन समृद्ध और बेहतर बन सकेगा । अच्छे नागरिकों से ही अच्छे राष्ट्र का निर्माण होता है ।
दुनिया भर में नियमों, कानूनों आदि की पालना में जापान जैसे देशों का नाम सबसे ऊपर प्रथम पंक्ति में आता है । क्योंकि ऐसे राष्ट्रें के नागरिक अपने राष्ट्र के चरित्र के बारे में चिंतन रखते हैं तथा नियमों को जानते ही नहीं बल्कि उनको पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ मानते भी है ।
तो आईये, इस दीपावली यह संकल्प ले कि मैं राष्ट्र के कानूनों व नियमों को जानने के साथ-साथ उसे पूर्ण लग्न व निष्ठा के साथ मानूँगा भी । यह मेरा नैतिक दायित्व है । तभी कहीं जाकर भारत दुनिया में श्रेष्ठता की कसौटी पर खरा उतर पायेगा । हम दुनिया में अपना सिर गर्व से ऊंचा कर सकेंगें । सभी को दीपावली की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं ।
