-पुलिस पर राजनीतिक गठबंधन का लगा आरोप

जयपुर,( दिनेश शर्मा” अधिकारी”)। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर सचिव ने विभिन्न समाचार पत्रों में सितंबर 2022 को प्रकाशित समाचार शीर्षक “आखिर पुलिस की कार्यशैली पर क्यों उठते हैं सवाल “…..???? खबर पर स्वयं प्रेरित संज्ञान लेते हुए कोटा जिले के नयापुरा थाने में पीड़ित की शिकायत दर्ज ना होने से खफा होकर राधेश्याम द्वारा थाना परिसर में खुद को पेट्रोल छिड़ककर आग के हवाले करने पर तथा 6 दिन बाद दिल्ली में उपचार के दौरान मौत होने की घटना पर कार्यवाही करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और पुलिस अधीक्षक कोटा को आदेश जारी कर संपूर्ण प्रकरण की तथ्यात्मक प्रगतिवाद रिपोर्ट सहित घटना वाले दिन 15 सितंबर की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित प्रति जयपुर कार्यालय भिजवाने के आदेश जारी किए। पैनल अधिवक्ता भुवनेश शर्मा को मृतक परिजन को प्रतिकर स्कीम क्षतिपूर्ति दिलाने के लिए एट्रोसिटी साइट पर पीड़ित की डिटेल अपलोड करने के निर्देश दिए।
प्राधिकरण सचिव ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संपूर्ण प्रकरण की अपने स्तर पर जांच कर सम्पूर्ण रिपोर्ट जयपुर कार्यालय को प्रेषित करें साथ ही पीड़ित परिजनों को समस्त विधिक सहायता उपलब्ध कराते हुए मॉनिटरिंग कमेटी के माध्यम से अन्वेषण कर पैनल अधिवक्ता की नियुक्ति करें, पीड़ित परिजनों को प्रतिकर स्कीम में क्षतिपूर्ति राशि दिलाने की व्यवस्था करें।
उल्लेखनीय है कि नयापुरा थाने में मुकदमा क्रमांक 342 2022 के क्रम में राधेश्याम मीणा द्वारा थाने में आत्मदाह का प्रयास किया और पुलिस ने पीड़ित के खिलाफ़ राजनीतिक दबाव के चलते 341 323 66 आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कर प्रार्थी को परेशान किया प्रार्थी की ओर से शिकायत दर्ज नहीं करने पर प्रार्थी ने थाने में पेट्रोल छिड़ककर स्वयं को आग के हवाले कर दिया। जिसमें आरोपी हरि ओम, सुमन, अमित को गिरफ्तार कर न्यायिक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिस द्वारा विभागीय स्तर की जांच में एस एच ओ भूपेंद्र सिंह को लाइन हाजिर, एवम् एसआई बच्चन सिंह और सतीश को निलंबित किया गया। पीड़ित परिजनों ने बताया कि कक्षा 12 तक की बालिकाओं को अनुसूचित जाति और जनजाति में मिलने वाली 12,600 स्कॉलरशिप राशि की मांग करने पर विपक्षी अड़ंगा लगा रहे थे, जिसे मृतक ने सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक दिया। इस बात से खफा होकर एकजुट होकर घर में घुसकर पीड़ित परिवार के साथ मारपीट की जिसकी पुलिस ने एफ आई आर दर्ज नहीं करने पर पुलिस द्वारा राजनीतिक लोगों के दबाव में आने से खफा होकर थाने परिसर में कि मृतक ने थाने परिसर में आत्मदाह किया, जिसका 6 दिन बाद दिल्ली में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।