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जैविक कृषि उत्पादों के उत्पादन एवं विपणन के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू


– जैविक कृषि उत्पादों की विपणन रणनीति बनाना आज की आवश्यकता- डॉ. अरुण कुमार

बीकानेर, । स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अर्थ शास्त्र विभाग एवं चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान, जयपुर के संयुक्त तत्वाधान में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन मंगलवार को एसकेआरएयू में हुआ।
जैविक कृषि उत्पादों के उत्पादन एवं विपणन रणनीति पर आयोजित प्रशिक्षण शिविर के मुख्य अतिथि बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अंबरीश शरण विद्यार्थी थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान में पशुधन के बाहुल्य को देखते हुए यहाँ गोबर तथा गौमूत्र आधारित जैविक कृषि ज्यादा सफल रहेगी जो भविष्य में प्राकृतिक खेती का भी अभिन्न अंग होगी। उन्होंने जीरो बजट खेती की प्रासंगिकता पर जोर दिया।
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरूण कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में जैविक कृषि उत्पादों की तरफ किसानों का रूझान बढ़ा है परंतु सही विपणन व्यवस्था न बन पाने के कारण इस हेतु कुशल रणनीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर इसके लिए प्रयासरत हैं। इससे पूर्व प्रशिक्षण संयोजक डॉ. दाताराम ने प्रशिक्षण की भूमिका एवं क्रियान्विति के बारे में बताया।
डॉ. पी.के. यादव ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि पश्चिमी राजस्थान में कैर तथा खेजड़ी के पौधे प्राकृतिक धरोहर एवं जैविक रूप में विद्यमान हैं जिनका मूल्यसंवर्धन करने तथा विपणन व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि बीकानेर जैसी भूमि के परिपेक्ष में मूंग, मोठ, चना आदि जैविक उत्पाद के रूप में ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, इन पर बीकानेर का भुजिया पापड़ एवं बड़ी उत्पाद टिका है।
डॉ. आई.पी. सिंह ने कहा कि किसानों को ऑर्गेनिक उत्पादों के प्रमाणीकरण कराने के लिये प्रशिक्षित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने ऑर्गेनिक मार्केटिंग करने हेतु किसानों को ऑनलाइन माध्यमों से जुडने पर बल दिया।
इस अवसर पर सभी अधिष्ठाता निदेशक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। डॉ. विक्रम योगी ने धन्यवाद ज्ञपित किया।

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