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ज्योति उर्फ श्रवण बेटी की बहादुरी को भूगोल प्रधानाध्यापक ने एक विशाल रेखाचित्र बनाकर किया प्रदर्शित

बीकानेर-ओम एक्सप्रेस न्यूज(खास)-भारत में जारी लॉकडाउन इस बीच लाखों मजदूर अपने घर से दूर दूसरे राज्यों में फंसे हुए थे।जिन्होंने बाद में पैदल ही मीलों का सफर तय करना शुरू किया। कोई पैदल जा रहा था, कोई अपने बच्चों को गोद में लिए चल रहा था, लेकिन एक 15 साल की लड़की अपने पिता को साइकिल पर बिठाकर हरियाणा के गुरुग्राम से निकली और पहुंच गई 1200 किलोमीटर का सफर तय कर बिहार के दरभंगा यानी अपने घर ..आज के दौर में जहां माता-पिता को बच्चे बोझ समझने लगे हैं। वहीं ज्योति को श्रवण बेटी की उपाधि दी जा रही है।

भूगोल प्रधानाध्यापक मुकेश शर्मा व अंशुल शर्मा ने मिलकर भदाना गांव की चौपाल में बिहार की 15 साल की बच्ची ज्योति उर्फ श्रवण कुमारी की बहादुरी को एक विशाल रेखाचित्र बनाकर प्रदर्शित किया । इस लोकडाउन में जहां मजदूर,मजबूर होकर पैदल ही पलायन कर रहें है। वहीं ज्योति की हिम्मत ने सभी को एक शक्ति प्रदान की है।ज्योति ने अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठाकर गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा तक 1200 किलोमीटर की दूरी तय की । सात दिन तक लगातार साइकिल चलाकर ज्योति अपने पिता के साथ घर पहुंची । ज्योति ने अपने जनधन खाते से मिले पांच सौ रुपये निकाले और उससे एक पुरानी साइकिल खरीदी । उस साइकिल पर अपने बीमार पिता को बिठाकर अपने घर की तरफ चल पड़ी ।

ज्योति के हौंसले को देखकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी और सलाहकार इवांका ट्रम्प ने बिहार की इस बेटी तारीफ की। इसके बाद साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उन्हें ट्रॉयल के लिए बुलाया है । ट्रायल सफल रहता है तो ज्योति को दिल्ली में नेशनल साइकिलिंग एकेडमी में फेडरेशन के खर्च पर ट्रेनिंग दी जाएगी । ज्योति का कहना है कि इस ऑफर से बहुत खुश हूं और अगले महीने ट्रायल देने जरूर जाऊंगी । ज्योति के सहास व अपने पिता के प्रति भावना को देखते हुए कहा जा सकता है कि -कौन कहता है कि सिर्फ बेटे घर का चिराग हैं,बेटियाँ भी घर को रौशन करती हैं । ज्योति की इस हिम्मत व सहनशीलता की पूरे भारतवर्ष में प्रशंसा हो रही है ।

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