– धर्म और शिक्षा का व्यवसायीकरण समाज के लिए सबसे बड़ा घातक
— माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा भोज
सुपौल।सुपौल जिला मुख्यालय स्थित बी.बी.सी. कॉलेज सभागार में 09 अगस्त 2021 सोमवार को सम्पूर्ण मुक्ति क्रांति का आगाज करते हुए लोरिक विचार मंच के प्रदेश संयोजक डॉ. अमन कुमार ने कहा कि भारत दुनियॉ का सबसे प्राचीन देश है। यहाँ की सभ्यता और संस्कृति विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। फिर भी कुरीति, रूढ़िवादी परंपरा और अंधविश्वास के कारण उनकी छवि धूमिल हो रही है। कुरीति भारतीय समाज, सभ्यता और संस्कृति को कलंकित कर रहा है। कुरीति मिटाकर ही समाज, धर्म और देश को बचाया जा सकता है। समाज सुधारक डॉ. अमन कुमार ने कहा कि सम्पूर्ण मुक्ति क्रांति के अंतर्गत सामाजिक क्रांति, सांस्कृतिक क्रांति और आध्यात्मिक क्रांति शामिल है। इंसान साम्प्रदायिकता, सत्ता, जाति, अकूत सम्पति और शराब, गांजा, भांग, हफीम आदि नशा के कारण अपराध कर रहे हैं। तमाम कुरीतियों व बुराइयों को सामूहिक प्रयास से ही दूर किया जा सकता है। कुरीति समाज का सबसे बड़ा कैंसर है जो समाज को दिन-प्रतिदिन दीमक की तरह खोखला कर रहा है। जिसके कारण मानवता और सामाजिक बंधन कमजोर हो रहा है। कुरीति मिटाकर ही भारत को स्वच्छ, सुंदर, खुशहाल, शिक्षित और विकसित भारत बनाया जा सकता है। कहा कि मृत्युभोज मुर्दा खाने के समान है। यह धर्म का हिस्सा नहीं है। ख़ुशी में भोज और दुःख में केवल शोक होना चाहिए। मृत्युभोज कल्याणकारी नहीं विनाशकारी है। मृत्युभोज के जगह जनहित का कार्य करना चाहिए। पढ़े-लिखे लोग भी यदि मृत्युभोज खाते हैं या करते हैं तो उनकी शिक्षा पर धिक्कार है। जीवित अवस्था में माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा भोज है। भारतवासियों के द्वारा कुरीति मिटाने के बाद भारत माता के सर गर्व से ऊँचा रहेगा।
समाज सुधारक ने शिक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा सबसे बड़ा शक्तिशाली हथियार और दान है। इसीलिए शिक्षित व्यक्ति अपने समाज को विकसित करने में शिक्षा का दान करे। दुनियाँ की सभी धर्मों की बुनियाद स्वच्छता पर टिकी हुई है। स्वास्थ्य, समृद्धि और सम्मान के लिए स्वच्छता आवश्यक है। धर्म और शिक्षा का व्यवसायीकरण समाज के लिए सबसे बड़ा घातक है। कहा कि धर्म की आर में बलि देना कहीं से भी उचित नहीं है। पशु बलि अंधविश्वास और मानवीय मूर्खता की पराकाष्ठा है। बलि प्रथा का जो समर्थन करता है वह धर्म विरुद्ध दानवी आचरण करता है। धर्म की रचना संसार में शांति और सद्भाव बढ़ाने के लिए हुई है। सनातन धर्म में वेद, उपनिषद, गीता और पुराणों के मुताबिक बलि प्रथा हिन्दू धर्म का हिस्सा नहीं है। आज विज्ञान का युग है, जिसमें नए समाज की सोच आधुनिकता से युक्त और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लैस होनी चाहिए। कार्यक्रम में शशि मंडल, हिमांशु कुमार, अमोद कुमार मंडल, भरत सिंह, जयराम साह, राजेन्द्र कुमार, संतोष सादा, रंजीत कुमार, जितेंद्र कुमार झा, प्रीतम कुमार चौधरी आदि शामिल थे।