Site icon OmExpress

तन्त्र ने सलामी ली : गण ज़मीन पर रहा।

बीकानेर,— (मनोहर चावला) सरकार बदल गई। राम लला अयोध्या आ गये। पूरे देश ने इसके लिए ख़ुशियाँ मनाई। हमारे बीकानेर में भी कम उल्लास नहीं था। हमने भी घी के दीये जलाये, आतिशबाज़ी की, फिर दिवाली मनाई। सब कुछ अच्छा हो गया। इसके बाद हमने गणतन्त्र दिवस मनाया। तन्त्र ने सलामी ली गण ज़मीन पर रहा। सवाल फिर आकर खड़ा हो गया कि आख़िर बीकानेर का सुधार कौन करेगा ? मोदी जी ! जिन्होंने जेठानन्द व्यास के लिए वोट माँगे थे। सिद्धि कुमारी को हमने कई सालों से देख रखा हैं। जेठानन्द के बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। केन्द्रीय मन्त्री अर्जुन मेघवाल को हम देख चुके हैं। हाई- कोर्ट की बेंच वो आज तक ला नहीं सके। रेलवे फाटको की समस्या का समाधान वो करवा नहीं सके लेकिन हवाई अड्डे को जयपुर जैसा बनाने की योजना हैं। छह विधायक देने के बावजूद भी एक लूणकरनसर के विधायक सुमित गोदारा को मन्त्री बनाया गया हैं वो अपने क्षेत्र या गाँवो की सुध- खबर लेंगे या हमारे शहर बीकानेर की। वैसें बीकानेर के लोगो की कोई बहुत ज़ायदा अपेक्षायें नहीं है। वो सिर्फ़ चाहते हैं कि उनका शहर भी जोधपुर, जयपुर , कोटा, अजमेर, उदयपुर की तरह साफ़ सुथरा और सुन्दर बने। राजनेताओं की कमज़ोरी के कारण यहाँ न तो रेल फाटको की समस्या का निदान होता हैं न ही सीवरेज सिस्टम लागू होता हैं। न यहाँ सड़के बनती है न यहाँ सिटी बस चलती है। सूचना केन्द्र यहाँ डाक बंगले में चलता हैं। पार्को का यहाँ विकास नहीं होता। सुरसागर की समस्या ज्यो की त्यौ हैं। शहर के सबसे बड़े अस्पताल की अव्यवस्था किसी से छिपी नहीं हैं। कोई डाक्टर अपनी सीट पर नहीं मिलता। रेज़िडेंट डाक्टरों के भरोसे अस्पताल चल रहा हैं। बड़े डाक्टरों को अपनी प्राइवेट प्रेटिक्स से फ़ुरसत नहीं। अब तो उन्होंने अपने घर में ही दवा की दुकाने और लेबोरिटी खोल रखी है। यही हाल मिलावटखोरों का हैं कोई चीज यहाँ शुद्ध नहीं मिलती। दूध, घी, तेल मिर्च, मसाले, नमकीन, मिठाई अब असली कही नहीं मिलती। सम्बन्धित सभी लोगो के महीने बंधे हैं। शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था की क्या बात करे। आम आदमी का घर से निकलना मुश्किल हो गया हैं। जंगलराज की याद आती हैं। सड़को को व्यापारियों और गाड़े वालो ने घेर रखा हैं। टेम्पो और थ्री- व्हिलर वालो ने सड़क पर आम आदमी का चलना दुशवार कर रखा हैं। पुलिस सिर्फ़ हेलमेट चेकिंग में मशगूल हैं। उधर चोरिया निरन्तर बढ़ती ज रही हैं। पूर्व में एक सम्भागीय आयुक्त नीरज के पवन आये थे उन्होंने यातायात व्यवस्था कुछ सुधारी लेकिन नेताओ को अपने वोटो की चिन्ता थी उनका ट्रांसफ़र करा दिया। हम फिर वही आ गये। आप शहर में पैदल नहीं चल सकते। अब तो लोगो को यही इन्तज़ार हैं कि कोई मसीहा आयेगा जो इसके गौरव को लोटाएगा और बीकानेर को एक नया स्वरूप देगा। अंत में कवि दुष्यंत के शब्दों में— हो गई हैं पीर पर्वत सी- अब तो पिघलनी चाहिए। जनता को भी अब कुछ करने का समय हैं। —

Exit mobile version