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तप के साथ जरुरी है आराधना, साधर्मिक व्यक्ति का सहयोग करें : साध्वी सौम्यदर्शना


बीकानेर। श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ श्री संघ के अध्यक्ष रिखबचंद सिरोहिया ने बताया कि बुधवार से पर्वाधिराज पर्यूषण प्रारंभ हो गया है। आठ दिन तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान जप-तप व आराधना के आयोजन चलेंगे। जप व तप की महत्ता बताते हुए साध्वी सौम्यदर्शना ने कहा कि साधर्मिक व्यक्ति का सहयोग करें, उसे अपने समानस्तर पर लाएं। पर्यूषण के इन आठ दिनों में विशेषत: फूलों से परमात्मा की पूजा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल तप करने से ही नहीं तप के साथ जप व आराधना करेंगे तो ही तप का फल मिलेगा। साध्वी अक्षयदर्शना ने पांच कर्तव्यों तथा क्षमापना के बारे में बताया। जिसके साथ मनमुटाव, वैर हो गया है उसके साथ हो सके तो तुरन्त क्षमापना करें, उस समय न हो तो पर्यूषण के दौरान अवश्य क्षमा मांग लें। पर्यूषण पर्व संकेत देता है कि क्षमापना वही है जो एक बार गलती करने पर मिले, बार-बार गलती करने वाले के लिए क्षमापना का कोई महत्व नहीं है। आज की संघपूजा का लाभ मुख्य लाभार्थी परिवार मूलचन्द पुष्पादेवी सुरेन्द्र जैन बद्धाणी परिवार द्वारा लिया गया। 28 अगस्त को कोचरों के चौक स्थित पंचमंदिर में ज्ञानवद्र्धक दृश्य प्रदर्शित किया जाएगा। पर्यूषण पर विशेषरूप से साध्वी सौम्यप्रभा की निश्रा में सुबह भक्तामर, प्रवचन उसके बाद नवकार मंत्र जाप तथा भक्ति संध्या के कार्यक्रम नित्य हो रहे हैं। आज प्रभु अजीतनाथ भगवान की अंगी व विशेष पूजा-अर्चना की गई।

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