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तुलसी नर का क्या बड़ा, समय..-गहलोत सरकार के कुछ मंत्रियों का जागा स्वाभिमान, जल्द कमल का हाथ थामेंगे


-खेल ऐसा होगा कि राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी हो जाएगी खत्म, एक ही गुट बचेगा

जयपुर,(हरीश गुप्ता)। हजारों वर्षों पहले गोस्वामी तुलसीदास ने लिख दिया था कि समय ही सबसे बलवान है। वह बात आज भी पूरी तरह फिट होती है। पहले गहलोत से बात करना बड़ा काम था, अब गहलोत का फोन उन्हीं की पार्टी के नेता नहीं उठा रहे।
सूत्रों की मानें तो गुरुवार को महेंद्रजीत सिंह मालवीय के भारतीय जनता पार्टी में जाने की खबर फैली। जैसे ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इसकी जानकारी लगी, उन्होंने मालवीय से बात करनी चाही। चर्चाएं जोरों पर है, ‘मालवीय ने गहलोत का फोन रिसीव ही नहीं किया।’ अपने साथी से कहा, ‘…मंत्री बनाकर भी हमें बहुत दुखी ही किया, क्योंकि हम तो नाम के मंत्री थे, असल मंत्री तो देवाराम था।’
सूत्रों की मानें तो चर्चाएं जोरों पर है, ‘अकेले मालवीय ही नहीं कई और बड़े कांग्रेसी नेता भी है, जो भाजपा जाने वाले हैं।’ ‘…इनमें लालचंद कटारिया, राजेंद्र यादव, उदयलाल आंजना और रिछपाल मिर्धा है।‘ चर्चाएं तो यहां तक है, ‘राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी ही समाप्त हो जाएगी।’ ‘…सचिन पायलट भी भाजपा में जाने की तैयारी में है।’ वे टोंक- सवाई माधोपुर से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। ऐसे ही मालवीय भी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे और केंद्र में उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है। बेणेश्वर धाम यात्रा के दौरान देश की सर्वोच्च महिला से मुलाकात के बाद मालवीय का हृदय परिवर्तन हो गया।
सूत्रों की मानें तो चर्चाएं जोरों पर हैं,’पूर्व मंत्रियों का कांग्रेस से मन क्यों भर गया?’ ‘…सरकार ने मंत्रियों को दुखी करने में कसर कम नहीं छोड़ी थी।’ एक मंत्री के 9 बार सचिव बदले गए थे, दुखी होकर वे मंत्री पद से इस्तीफा देकर पहाड़ों में भक्ति करने चले गए थे। वह अलग बात है कि मंत्री के विभाग सरेंडर करने के कारण उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ और वह नाम के मंत्री बने रहे।
सूत्रों की मानें तो चर्चाएं यह भी है, ‘पिछली सरकार में साढे चार साल कुर्सी बचाने की लड़ाई चलती रही।’ ‘…लड़ाई के अंत में पायलट अताउल्लाह खान का गीत गुनगुनाते गए रह गए ‘अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का’। इस चुनाव के समय पता चला कि पावर तो पहले चली गई, अब पत्नी भी गई। सब कुछ खोने के बाद पायलट को भी कमल के फूल पर भरोसा ज्यादा नजर आ रहा है। उसका कारण है हाथ के नाम पर उन्हें केवल अशोक गहलोत का हाथ नजर आता है। डर यही सताता है किस्मत पर तो पहले पड़ चुका, गाल पर न पड़ जाए?
सूत्रों की मानें तो चर्चाएं यह भी है, ‘गहलोत सरकार में मंत्री अपनी हालत भूले नहीं है, इसलिए भाजपा में जाने वालों की सूची और लंबी हो सकती है। कुल मिलाकर राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी इसलिए खत्म हो जाएगी, क्योंकि गुट ही बस एक ही बचेगा।
सूत्रों की मानें तो चर्चाएं जोरों पर है, ‘ जैसा आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल दावा करते हैं 2019 में टायर‘ की मदद से 24 कमल लोकसभा पहुंचे थे राजस्थान से। इस बार भी कुछ ऐसा ही लग रहा है कि हनुमान बेनीवाल की बोतल भी 24 कमल के साथ लोकसभा पहुंचे।

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