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त्रिवेणीगंज बाजार क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी चरम पर

बिहार(सुपौल)- ओम एक्सप्रेस ब्यूरों-प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद भी किसानों को निर्धारित दामों पर खाद नहीं मिल पा रही है।जिले के त्रिवेणीगंज बाजार में खाद उर्वरक बिक्रेता जमकर किसानों की इस प्रमुख जरूरत की कालाबाजारी करते हुए खुले आम इनकी जेबों पर डाका डाल रहे है।किसान भी अब बुआई का समय फिसलते देख येन केन प्रकारेण खाद का जुगाड़ करने के लिए मनमानी कीमत चुकाने को विवश हैं आलम यह है कि क्षेत्र के कई गरीब छोटे किसान खाद खरीदने के लिए कर्जा उठा रहे है निजी खाद बिक्रेताओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि प्रशासन की सख्ती के बावजूद भी उन्हें किसी बात का डर नहीं है ऐसे में कालाबाजारी के इस खुले खेल में प्रशासन की भी संलिप्तता नजर आ रही है क्योंकि बगेर प्रशासनिक अधिकारियों की सांठ-गांठ के इतनी निडरता से यह काला कारोबार संचालित करना मुनासिब नहीं है ।

भले ही बीते दिनों किसानों के मसीहा के रूप में उभर कर सामने आये त्रिवेणीगंज एसडीएम विनय कुमार सिंह ने सघन छापेमारी और अपनी उपस्थिति में कुछ दुकानों पर से चंद किसानों को उचित दर पर खाद दिलाने का काम करते हुए आशा की किरण जगाई हो लेकिन किसानों की मानें तो उनके लिए यह महज छलावा ही नजर आया क्योंकि खाद व्यापारियों की मनमानी पर नकेल नहीं कसी गई और इन मुनाफाखोरों ने एकजुट होकर खाद गोदामों पर ताले जड़कर खाद बिक्रय बंद कर दिया ऐसे में फिर कोई भी अधिकारी खाद व्यापारियों को सबक सिखाने का साहस नहीं जुटा सका और प्रशासन के खाद कालाबाजारी को राकने के सारे दावे टांय टांय फिस्स हो गये मजबूरी में किसानों ने प्रशासन की सख्ती का खामियाजा भुगता और खाद व्यापारियों से पंगा लेकर पहले से भी अधिक दाम खाद के लिए चुकाये क्षेत्र में यह खाद बिक्रेता इतने शातिर हैं कि खाद का पहले से ही अच्छा स्टॉक इधर- उधर जमा कर बाहनी के समय खाद की कमी दर्शाकर मुंहमांगी दरों पर बेचकर जमकर अवैध बसूली किसानों से कर रहे हैं जबकि ऊंचे दामों पर खाद बेचने की वजह ये बताई जा रही है कि उन्हें खुद से ऊंचे दामों पर खाद बिक्रय हेतु उपलब्ध हो रही है और इसी कारण वे इसे ऊंचे दामों पर बेचने को विवश है वहीं सहकारी किसान सेवा समितियों और सरकारी गोदामों पर खाद की किल्लत इस गोरखधंधे को और अधिक बढावा दे रही है ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर इन सरकारी ठिकानों पर हर वर्ष खाद की किल्लत क्यों होती है और प्रशासन यहां पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने में असमर्थ क्यों? जिसके चलते बाजार में खाद की कालाबाजारी का धन्धा जमकर फलता फूलता है कृषि विकास योजनाओं के कियान्वयन के ठेकेदार खेती की सबसे बडी इस जरूरत को यहां पूरा क्यों नही कर पाते हैं।

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