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त्वरित टिप्पणी :
सचिन पायलट के पलटवार से कांग्रेस, आलाकमान व सीएम आये सवालों के घेरे में, नुकसान ही नुकसान

ढाई साल से आरोपों के सामने डटे और चुप रहकर एक्शन से जवाब देते रहने वाले सचिन पायलट का धैर्य आखिरकार आज टूट गया। परसों धौलपुर में सीएम अशोक गहलोत के 10 करोड़ के आरोप व वसुंधरा के सरकार बचाने वाले बयान से ही कांग्रेस के भीतर आग सुलगने लग गई थी, जिसकी ज्वाला आज पायलट की पीसी में सामने आई है।
पायलट ने गहलोत पर अब तक का सबसे बड़ा आरोप जड़ते हुए कहा कि सीएम ने अपने बयान से खुद ही कह दिया है कि उनकी नेता सोनिया गांधी नहीं वसुंधरा राजे है। उनकी सरकार को सोनिया, राहुल या कांग्रेस ने नहीं बचाया, राजे ने बचाया है। गहलोत ने भले ही ये बयान किसी राजनीतिक चाल के तहत दिया हो मगर वही अब उनके लिए मुश्किल खड़ी कर गया।
धौलपुर में सीएम ने गृह मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान, गजेंद्र सिंह पर सरकार गिराने का आरोप लगाया, वहीं भाजपा की ही राजे, कैलाश मेघवाल आदि को सरकार बचाने में सहयोग का श्रेय दे दिया। अपने आप मे ये कंट्रोवर्सी है। यदि मानेसर गये विधायक सरकार गिरा रहे थे तो फिर शाह, प्रधान, सिंह पर आरोप क्यों। इसके अलावा उनकी ही पार्टी के नेता राजे, मेघवाल के प्रति सहानुभूति क्यों। इस पर सवाल उठने तो वाजिब थे।
अब सचिन ने अपनी लड़ाई को भ्रष्टाचार की तरफ मोड़ दिया है। इसे उनकी राजनीतिक चतुराई माना जाना चाहिए। वे यहीं तक नहीं रुके हैं अपितु 11 तारीख से पैदल जन यात्रा की भी घोषणा पेपर लीक भ्रष्टाचार की जांच को लेकर निकालने की घोषणा कर दी है। राहुल की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करते रहने का संकल्प भी उन्होंने दौहराया। पायलट 11 को आरपीएससी, अजमेर से 125 किमी की पदयात्रा निकालने की घोषणा की है।
ये यात्रा एक तरफ जहां सीएम के 10 करोड़ के आरोप का जवाब है वहीं आलाकमान को भी चेतावनी है। बहुत सब्र कर लिया, अब निर्णय होना चाहिए। टालो और इंतजार करो की आलाकमान की नीति अब मुसीबत बन गई है। प्रभारी रंधावा की भी बोलती बंद हो गई है। उन्होंने कहा कि वे पंजाब में है, राजस्थान जायेंगे तब इस पर कुछ कहेंगे।
आज का दिन भी पायलट ने सोच समझकर चुना। राहुल कर्नाटक में प्रचार थमने के बाद आज सीधे राजस्थान के माउंट आबू आये हैं। अब तक दबी जुबान में कांग्रेसी ये भी कहते रहे हैं कि सचिन को राहुल व प्रियंका का साथ है। इस नये घटनाक्रम से तो बात कुछ और ही नजर आ रही है।
मगर ये तय है कि प्रदेश में सुस्त पड़ी भाजपा को गहलोत और सचिन ने बैठे बिठाये तकडा मुद्दा दे दिया। बिखरी भाजपा इससे एकजुट हो जायेगी और उसे जिन नेताओं को किनारे करना है उनको भी बिना हुज्जत के किनारे कर देगी। इतना तय है कि गहलोत के वार व सचिन के पलटवार से नुकसान कांग्रेस को होगा, अब भाजपा इसका कितना फायदा उठायेगी ये उस पर निर्भर है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार

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