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दिल्ली से सुपौल के चार मजदूर साइकिल से ही नाप दी घर की दूरी,अस्पताल में जांच के नाम पर थर्मामीटर भी नहीं

बिहार(सुपौल)ओम एक्सप्रेस -कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन की स्थिति है और इसका सबसे ज्यादा खामियाजा मजदूरों को उठाना पड़ रहा है। दिल्ली और अन्य बड़े शहरों से इन मजदूरों ने अपने-अपने गांवों का रुख कर दिया है। कोई साधन नहीं मिलने पर ये मजदूर भूख की समस्याओं को देखते हुए मजदूर साइकिल से ही हजारों किलोमीटर की दूरी अलापने में मुनासिब समझ रहें हैं। सुपौल जिले के अन्य प्रखंडों के 4 मजदूर रविवार को साइकिल चलाकर आठ दिन के लंबी यात्रा कर दिल्ली से त्रिवेणीगंज पहुंचे है। इसकी सूचना जैसे ही लोगों को मिली हड़कंप मच गया। जानकारी मिलने पर कॅरोना वाइरस में गरीबो के लिए हमदर्द बने कोरोना अगेंस्ट टीम से जुड़े सदस्यों ने सभी मजदूर को जांच के लिए अनुमंडलीय अस्पताल ले गई। अस्पताल पहुंचे मजदूर त्रिवेणीगंज प्रखंड के गुड़िया निवासी अजय यादव, प्रतापगंज के भवानीपुर निवासी कुंदन कुमार व गोविंदपुर निवासी प्रभु यादव जबकि राघोपुर के सोराजन निवासी देवनारायण यादव ने बताया कि वे लोग दिल्ली में मजदूरी करते थे। लॉकडाउन होने के बाद राशन और पैसे खत्म हो गया। भूख की समस्याओं को देखते हुए आठ दिन पहले ही अपने-अपने साइकिल से सभी गांव के लिए रवाना हो गए। बताया कि रात दिन साइकिल चलाकर वे लोग आठ दिन के बाद अपने जिले पहुंचे। सभी मजदूरों को अनुमंडलीय अस्पताल में बनें परामर्श केंद्र में तैनात स्वास्थ्य कर्मी ने काउंसिल कर सभी को चौदह दिन परिवार के सदस्यों से अलग रहने का निर्देश दिया।सबसे चौकाने वाला तथ्य यह है कि
अस्पताल में जांच के नाम पर थर्मामीटर भी नहीं है ।

त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल के परामर्श केंद में ड्यूटी पर तैनात काउंसेलर इस्तियाक अहमद ने बताया कि दिल्ली से आये चारों मजदूर से पूछताछ किया गया हैं। उसे अपने -अपने क्षेत्रों के मुखिया से संपर्क कर परिवार से अलग क्वारटेंन सेंटर में रहने का निर्देश दिया गया हैं। काउंसेलर ने बताया कि जांच के नाम पर अस्पताल में कुछ भी नहीं हैं। सस्पेकेड होने पर सुपौल भेजा जाता हैं, जहां जांच होती हैं।

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