बीकानेर।अभियांत्रिकी महाविद्यालय बीकानेर के मैकेनिकल विभाग तथा राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र के संयुक्त तत्वाधान में टैक्युप द्वारा प्रायोजित “बायो एनर्जी” विषय पर पांच दिवसीय ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम के दुसरे चरण का शुभारंभ महाराणा प्रताप कृषि व तकनीकी विश्वविद्यालय व मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. एस. राठोड ने वेबेक्स एप के माध्यम से किया ।

बी के प्राचार्य डॉ भामू व एन आई टी कुरुक्षेत्र के प्रो साथंस ने प्रतिभागियों व विशेषज्ञों का स्वागत किया I अपने सम्बोधन में बताया की सम्पूर्ण देश में प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है व बायो मास एनर्जी के दोहन से ग्रामीण भारत में रोजगार के साथ-साथ किसानो व मजदूरों की भी आय बढ़ेगी । उन्होंने भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार सही ऊर्जा उपयोग के उपयोग की तकनीक अपनाकर गावों को आत्म निर्भर बनाने पर जोर दिया ।

बतौर प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता आई.आई.टी. दिल्ली के प्रो. वी.के. विजय ने बताया की ऊर्जा के क्षेत्र में अभी बायोफ्यूल का केवल 1 % ही योगदान है जिसे हमें लगभग 10 % तक बढ़ाना है जिसके पूरे देश में जागरूकता अभियान चलाना होगा I उन्होंने बताया की स्वराज की संकल्पना तभी साकार होगी जब हमारे गाँव देश की अर्थव्यवस्था में सक्रिय योगदान देंगे I इसके लिए तकनीकी महाविद्यलयों को अपने नज़दीक के 5 गांवों को तकनिकी रूप से सुद्रढ़ बनाने का संकल्प लेना होगा ।

द्वितीय सत्र मे कुरुक्षेत्र के ड़ॉ, रजनीश व पी.डी.पी.यू. गुजरात के प्रो. कच्छावा ने अपने वक्तव्य में बायो गैस के उत्पादन, उपयोग व क्षमता बढ़ाने के उपायों की विस्तार से चर्चा की । उन्होंने बताया की आने वाले वर्षों में कंप्रेस्ड बायोगैस का वाहनों में ईंधन के रूप में उपयोग को बढ़ावा मिलेगा , जिससे देश प्रदुषण मुक्त हो सकेगा I डॉ. जयप्रकाश भामू व डॉ ओ.पी. जाखड़ ने बताया की टेक्विप-III के माध्यम से आयोजित की जा रही ट्रेनिंग में देश भर के 400 शोधार्थी व संकाय सदस्य विशेषज्ञों को सुन पाएंगे ।

विभागाध्यक्ष डॉ सी.एस. राजोरिया ने बताया की स्वच्छ भारत के अंतर्गत जन सहभागिता को एक कदम आगे बढ़ाते हुए कचरा प्रबंधन को सस्टेनेबल विकास का महत्वपूर्ण अवयव बनाना होगा जिससे देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता मिल सके । कोऑर्डिनेटर डॉ धर्मेंद्र सिंह ने बताया की दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर एकजुट हो रही हो तब एक मनुष्य और समाज के रूप में हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रकृति के साथ तारतम्यता बनाकर जीना है और उसी के मुताबिक अपनी जीवनशैली को ढालना है। डॉ रवि कुमार ने ट्रेनिंग में भाग लेने वाले प्रतिभागियों वे विशषज्ञों का आभार व्यक्त किया व महाविद्यालय द्वारा छात्रहित में चलायी जा रही गतिविधियों से अवगत कराया