Site icon OmExpress

नई शिक्षा नीति की जोरदार पहल, स्कूलों में बच्चे पढ़ाई के साथ अब सीखेंगे शतरंज की चाल

अनूप कुमार सैनी
रोहतक। नेशनल महासचिव कुलदीप ने पढ़ाई-लिखाई के साथ स्कूलों में अब बच्चों की तार्किक क्षमता बढ़ाने का भी काम होगा। नई शिक्षा नीति में इसे लेकर जोरदार पहल की गई है। भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) से मान्यता प्राप्त एवं वित्त मंत्रालय भारत सरकार द्वारा एकमात्र आयकर छूट प्राप्त हरियाणा शतरंज एसोसिएशन (एचसीए) एवं भारतीय शतरंज महासंघ (एआईसीएफ) के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को अनिवार्य रुप से शतरंज खेलने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही उन्हें शब्द और तर्क पहेलियों जैसी गतिविधियां से भी जोडऩे की सिफारिश की गई है। शिक्षा नीति में बच्चों में घटती तार्किक क्षमता को लेकर चिंता जताई गई है।

प्रवक्ता के अनुसार नई शिक्षा नीति के प्रस्तावित मसौदे में कहा गया है, जिस तरह से स्कूलों में बच्चों के स्वस्थ रहने के लिए खेलकूद और शारीरिक कसरत जरूरी है, उसी तरह से दिमाग के विकास के लिए दिमागी कसरत भी जरूरी है। जो शतरंज या दूसरी तार्किक गतिविधियों से हासिल हो सकती है। नई शिक्षा नीति के मसौदे से साफ है कि स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने और बच्चों के विकास के लिए चिंतन किया गया है।
उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति में शतरंज को पूरी ताकत के साथ बढ़ावा देने की बात कही गई है। मसौदे में कहा गया है कि इस शतरंज खेल का उद्भव उदय भारत में ही हुआ है। शब्द, समस्या-समाधान और तर्क पहेलियां बच्चों में तार्किक क्षमता को बढ़ाने का एक आनंददायी तरीका है, इसके जरिए बच्चों में तर्क करने की क्षमता विकसित की जा सकती है।


नई शिक्षा नीति में कहा गया है कि यदि स्कूली स्तर पर बच्चों में तर्क करने की यह क्षमता विकसित कर दी जाए, उसे पूरे जीवन उसका फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के मसौदे से साफ है कि स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने और बच्चों के विकास के लिए कितने निचले स्तर पर चिंतन किया गया है। मसौदे में बच्चों को गणितीय अंक ज्ञान से जोडऩे की सिफारिश भी की गई है।
उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के मसौदे में कहा गया है कि मौजूदा समय में बच्चे केवल एक करोड़ तक गिनना सीखते है, जो कि आज की दुनिया में अपर्याप्त है। आज के आधुनिक समय में बच्चों को दस की घात- एक से महाशंख तक सिखाना चाहिए, ताकि वे बड़ी संख्याओं को समझ सके और अपने जीवन में इस्तेमाल कर सके।


प्रवक्ता ने बताया कि रिपोर्ट में शतरंज को पूरी ताकत के साथ बढ़ावा देने की बात कही गई है। साथ ही कहा गया है कि इस खेल का उद्भव भारत में ही हुआ है। भारतीय बच्चों को इस खेल से अनिवार्य रुप से जोडऩा चाहिए।
गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति के मसौदे पर सरकार फिलहाल अभी राय ले रही है। जिसकी अंतिम तिथि 30 जून है। इसके बाद इसके अमल की प्रक्रिया शुरू होगी।

Exit mobile version