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नव वर्ष मनाने का अंतर समझे


हम मोटे तौर पर साल में दो बार नव वर्ष जनता को मनाते हुए देखते हैं। थर्टी फर्स्ट नाइट नव वर्ष लोग मनाते हैं देर रात तक जगते हैं कई लोग शराब पार्टी डांस में मस्त होते हैं देर रात तक सोते हैं और नए साल के दिन बड़े थके अलसाये देर सबेर उठते हैं कई लोगों को सिर में भारीपन रहता है और मुरझाए मुरझाए रहते हैं।
वीर संवत नव वर्ष से सबक लें
जिस तरह वीर संवत नव वर्ष को सभी जितना हर्ष उल्लास से मनाते हैं सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर नए कपड़े पहन कर धार्मिक स्थल पर जाना भक्ति भजन करना घरों की साफ-सफाई नए पकवानों को बनाना और आपस में एक दूसरे को आदर पूर्वक बधाई देना। हिंदू मान्यता के हिसाब से यह एक अनमोल दिन है। काश हर व्यक्ति इस दिन की तरह हमेशा रहना सीख जाए तो उसके जीवन में वर्ष भर हर्ष उल्लास बना रहेगा।
यह एक भारतीय हिंदू संस्कृति का सिलसिला बरसों से है जिससे नई जनरेशन समझ नहीं पाई और उनकी जीवनशैली मैं एक अलग ही बदलाव आ गया। समय आ गया इस भारतीय सभ्यता को नई पीढ़ी को समझे और इसी तरह नव वर्ष मनाने के तरीके को अपनाएं। भारतीय संस्कृति को किसी जाति धर्म से ना जोड़ें, भारत का ह्रदय बड़ा है यहां हर धर्म के लोग रहते हैं और सभी त्योहार उत्सव बहुत खुशी पूर्वक मनाते हैं।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

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