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नेताओं ! क्या वाकया जनता त्रस्त है ? :हेम शर्मा

बिजली पानी की इन दिनों जबर्दस्त किल्लत है। देवी सिंह भाटी सरकार और प्रशासन से जवाब तलबी के लिए हल्ला बोल आंदोलन कर रहे हैं। उनका मानना है कि समाज को संगठित कर वे व्यवस्था परिवर्तन करेंगे। वे जिलेभर में घूम रहे हैं। जनता की परेशानियों को लेकर उनकी संवेदना जगा रहे हैं। देवी सिंह भाटी के विरोधी इसे राजनीतिक स्टंट मान रहे हैं। अगर जनता बिजली पानी की परेशानी से त्रस्त हैं तो बाकी नेता चुप क्यों है ? पानी बिजली की गर्मी में मांग बढ़ने से हर वर्ष किल्लत हो ही जाती है। पश्चिमी राजस्थान और बीकानेर में नहर आधारित पेयजल व्यवस्था है। इन दिनों मरम्मत के लिए नहर बंदी होने से पानी की और किल्लती बढ़ जाती है। प्रशासन भी इन हालातों के प्रति सजग रहता ही है। गांवों में बिजली पानी का संकट इन दिनों बढ़ा है। सवाल यह है कि जनता से जुड़ी इन दिक्कतों के प्रति हमारे नेता कितने संवेदनशील है। बीकानेर जिले में सात विधायक, गिरधारी लाल महिया, सुमित गोदारा, बिहारी लाल विश्नोई, भंवर सिंह भाटी, गोविंद मेघवाल, डा बी डी कल्ला, सिद्धि कुमारी। इनमें से कल्ला, मेघवाल और भाटी मंत्री है। सरकार और बेहतर करें इसके लिए सत्ता के नेताओं और विपक्ष के विधायकों की भूमिका से जनता को कोई उम्मीद है ? पानी बिजली की किल्लत विपरीत हालातों में जनता को भुगतनी ही पड़ेगी। भाजपा और कांग्रेस में और भी सक्रिय नेता है रामेश्वर डूडी जो किसानों से जुड़े बार्ड के अध्यक्ष हैं। लक्ष्मण कड़वासरा, भूदान बोर्ड अध्यक्ष, महेंद्र गहलोत केश कला बोर्ड अध्यक्ष के अलावा कांग्रेस संगठन के पदाधिकारी, पूर्व मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल, पूर्व विधायक मंगला राम गोदारा अपनी सरकार के कार्यकाल में इन जन पीड़ाओं को समझ नहीं रहे हैं क्या। भाजपा मजबूत विपक्ष होते हुए शहर देहात अध्यक्ष, पूर्व विधायक डा विश्वनाथ और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल जनता की इन परेशानियों की आवाज क्यों नहीं बन रहे हैं। क्या जनता की समस्याएं नेताओं के लिए राजनीति करने के मात्र मुद्दे ही होते हैं। जब जो जिसे अनुकूल लगे राजनीतिक टूल बना लेते हैं। अगर वास्तव में जनता पानी, बिजली, मनरेगा को लेकर तकलीफ भुगत रही है तो देवी सिंह भाटी के अलावा बाकी नेता चुप क्यों हैं? सत्ता पक्ष और विपक्ष इसे जनता की तकलीफ क्यों नहीं मान रहे हैं। भाटी जो अभी किसी पार्टी में नहीं हल्ला बोल क्यों कर रहे हैं? जनता की आवाज तो हर जनप्रतिनिधि को ही बनना चाहिए क्या ऐसा नहीं होना चाहिए ?

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