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नेशनल हुक:पीएम की तर्ज पर नीतीश भी यूपी से ही लड़ सकते हैं चुनाव, फूलपुर सीट पर सर्वे कराया

भारतीय राजनीति में ये किवदंती है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है। इसीलिए पीएम नरेंद्र मोदी ने भी अपने गृह राज्य गुजरात को छोड़कर यूपी की बनारस सीट से चुनाव लड़ा। इसी तर्ज पर अब इंडिया गठबंधन के नीतीश कुमार भी अपने गृह राज्य बिहार के स्थान पर यूपी से लोकसभा चुनाव लड़ने का मानस बना रहे हैं। हालांकि इंडिया ने अभी तक ये स्पष्ट नहीं किया है कि गठबंधन की तरफ से पीएम का चेहरा कौन है। गठबंधन के नेताओं ने बयान दिया है कि चुनाव के बाद इस पर निर्णय किया जायेगा। मगर नीतीश यूपी से चुनाव लड़ना लगभग तय कर चुके हैं।
नीतीश के लिए उनके नेताओं व समर्थको ने वही चुनाव क्षेत्र चुना है जो कभी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का क्षेत्र हुआ करता था। फूलपुर। इस सीट की जातीय गणित को देखते हुए ही नीतीश के लिए ये सीट चुनी गई है। पहले यहां के मतदाताओं में कई दिनों तक इस बात को लेकर चर्चा की गई। एक महीने की चर्चा से सकारात्मक विचार सामने आये।
इस चर्चा के बाद हाल ही में बताते हैं इस सीट पर उनकी उम्मीदवारी को लेकर एक सर्वे भी कराया गया। जिसके परिणाम उत्साहजनक माने जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि 60 फीसदी से अधिक यहां के मतदाता नीतीश की उम्मीदवारी के पक्ष में है। उनका मानना है कि नीतीश के आने से सारे समीकरण उलट जायेंगे। क्योंकि सपा, कांग्रेस व आरएलडी भी उनका समर्थन करेगी। इस हालत में इस सीट पर वे शक्तिशाली उम्मीदवार बन जाएंगे। जिसका असर आसपास की सीटों पर भी पड़ेगा। अति पिछड़ा वर्ग के मतों का रुझान बदलेगा, जिसका फायदा सपा, कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन के सभी दलों को होगा।
इंडिया गठबंधन नीतीश ही नहीं अपने अन्य बड़े नेताओं के लिए भी ऐसी सीटें तलाश रहा है जो उनके लिए तो सुरक्षित हों ही मगर साथ ही आसपास की सीटों पर भी असर पड़े। इसके लिए भी कई सीटों पर नेताओं के नाम लेकर सर्वे कराए जा रहे हैं। आम चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन ने अभी से रणनीतिक तैयारी आरम्भ कर दी है जबकि गठबंधन की तीसरी बैठक महाराष्ट्र में होनी बाकी है। जिसमें राज्य वार सीटों के वितरण की बात तय होगी।
यूपी पर भाजपा की तरह इंडिया गठबंधन का भी पूरा जोर है। सपा 35 सीट पर पर्यवेक्षक लगाकर वर्किंग कर चुकी है। जयंत चौधरी भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर अभी से अपने उम्मीदवार तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कांग्रेस की नजर अपनी परंपरागत सीटों पर है। वहीं भाजपा अपने साथ छोटे दलों को ला रही है ताकि पिछले प्रदर्शन को दोहरा सके। यूपी में इस बार तकड़ी कशमकश होगी।

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