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कांग्रेस की सियासत का रंगमंच अब राजस्थान बन गया है। भले ही राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा मध्यप्रदेश में है मगर कांग्रेस राजस्थान के कारण सुर्खियों में है। सुर्खियों की वजह है कल का दिया सीएम अशोक गहलोत का बयान और उसके प्रत्युत्तर में दी गई सचिन पायलट की प्रतिक्रिया। बहती गंगा में राजस्थान के व अन्य राज्यों के कांग्रेस नेताओं ने भी बयान देकर हाथ धोये हैं।
कल अगले महीने के आरम्भ में राजस्थान में प्रवेश करने वाली राहुल की भारत जोड़ों यात्रा की तैयारी की बैठक पीसीसी में थी। तैयारियों पर बात के लिए सभी नेता आये हुए थे। अर्से बाद एक ही बैठक में गहलोत व पायलट भी थे। मगर दोनों ने नजरें तक नहीं मिलाई। उल्टे भौहें तनी रही। बैठक समाप्त होने से आधा घंटे पहले पायलट बैठक छोड़कर निकल गये और बाहर आकर मीडिया से बात करके कांग्रेस एकता की नसीहत भी इशारे में गहलोत को दे दी। ये सब देखकर भी गहलोत चुप रहे।
हाई वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामा तो तब शुरू हुआ जब सुबह सोशल मीडिया पर पायलट मध्यप्रदेश में भारत जोड़ों यात्रा में राहुल व प्रियंका के साथ दिखाई दिये। ट्विटर पर एक फोटो ऐसी थी जो गहलोत गुट को विचलित कर दे। अलग, एकांत में पायलट राहुल व प्रियंका के साथ मुस्कुराते हुए खड़े थे। ये फोटो पायलट समर्थकों ने ट्विटर पर खूब वायरल की और उकसाने का भाव वाले इमोजी भी लगाये। बस, ड्रामा मंच से जनता के बीच आ गया। गहलोत ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में पायलट पर आरोपों की झड़ी लगा दी। गद्दार भी कह दिया। ये भी कह दिया कि उनकी सरकार को गिराने में 10 – 10 करोड़ रुपये लिए गये। अमित शाह व धर्मेंद्र प्रधान से डील भी हुई। गहलोत यहीं नहीं रुके, ये भी कह दिया कि पायलट के साथ 10 विधायक नहीं है। उनको आलाकमान कैसे सीएम बनाये। उन्होंने ये भी बोल दिया कि पायलट कभी सीएम नहीं बन सकते।
इससे पहले जब असंतोष उभरा और पायलट अपने विधायकों के साथ मानेसर गये तब भी गहलोत ने एक बार उनको नाकारा तक कह दिया था। हालांकि उनका दर्द था ये, क्योंकि 34 दिन तक सरकार व उनके समर्थक विधायकों को होटलों में बंद होकर रहना पड़ा था। मगर उस समय दोनों के मध्य जो तल्खी पैदा हुई उसे समय ने कम नहीं किया अपितु बहुत अधिक बढ़ा दिया।
पायलट जो इस मामले में सार्वजनिक रूप से तल्ख बोलने से बचते रहे हैं, वे भी आज तो बोल गये। पहले जब गहलोत ने कुछ कहा तब ये कहकर टाल दिया कि वे बड़ें हैं, मैं उनकी बातों का बुरा नहीं मानता। आज उन्होंने साफ साफ कहा कि इस तरह का बयान उन्हें शोभा नहीं देता। ये समय कांग्रेस को मजबूत करने का है ताकि भाजपा का मुकाबला कर सकें। सचिन ने यहां तक कह दिया कि पता नहीं किसकी सलाह पर वे ऐसे बयान दे रहे हैं। अपने पर लगे आरोपों को भी पायलट ने खारिज किया। पायलट गुट के राज्य में मंत्री राजेन्द्र सिंह गुडा ने बोलने में कंजूसी नहीं बरती। उन्होंने साफ साफ तो नहीं मगर अपरोक्ष रूप से कह दिया कि अब गहलोत के साथ 10 विधायक भी नहीं बचे हैं। पायलट के प्रति विधायकों के झुकाव को भी वे बता रहे थे। उनका सवाल था कि जब 10 करोड़ की बात उनको मालूम थी तो मानेसर जाने वालों में से 5 को मंत्री क्यों बनाया। उस समय सबूत होते तो बता देते, मामला उसी समय सुलझ जाता। गुडा ने बताया कि मेरे सहित जो 6 विधायक उस समय गहलोत के साथ थे, आज पायलट के साथ हैं। वे गहलोत पर हमलावर थे तो आलाकमान के प्रति निष्ठा जता रहे थे। गुडा ने लगे हाथ धारीवाल जी के यहां हुई बैठक को अनुशासनहीनता बताते हुए महेश जोशी व शांति धारीवाल पर कार्यवाही करने की मांग भी कर डाली।
भारत यात्रा के यात्री व मीडिया की कमान संभाल रहे जयराम रमेश ने कहा कि यात्रा के बात सब मसला सुलझ जायेगा। प्रियंका गांधी के राजनीतिक सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णम ने तो सीधे ही गहलोत पर आलाकमान को ब्लैकमेल करने का आरोप लगा दिया। उन्होंने एक चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि उनका ये बयान आलाकमान को चुनोती है। उनके बयान ने दिल्ली में भी राजस्थान कांग्रेस की सियासत को गर्मा दिया है। वहीं नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने भी गहलोत को घेरा।
कुल मिलाकर लगता है कि राजस्थान कांग्रेस में जितना हाई वोल्टेज ड्रामा सामने चल रहा है उससे कई गुना ड्रामा पर्दे के पीछे भी चल रहा है। गुर्जर आंदोलन, बेरोजगारों का आंदोलन, मंत्री – कलेक्टर की टकराहट, बैंसला के साथ धर्मेंद्र सिंह राठौड़ की तस्वीर आदि भी यूं ही की घटनाएं नहीं है। वहीं बारबार पायलट का राहुल व प्रियंका से मिलना भी अर्थवान है। गहलोत का इस तरह से हमला भी कूटनीति का ही परिणाम प्रतीत होता है। मगर राजस्थान कांग्रेस के विवाद ने पार्टी आलाकमान को सकते में जरूर डाला है। आलाकमान ने भी गहलोत के बयान को गंभीरता से लिया है, मगर वो गुजरात चुनाव को देखते हुए चुप है। सूत्र बताते हैं कि आलाकमान दोनों गुटों की बयानबाजी को देखते हुए शीघ्र बैठक भी बुला सकता है। चुप दिख रही भाजपा भी अंदरखाने ज्यादा सक्रिय है, इस तरह की स्थितियों से फायदा कैसे मिले, ये वो जानती है।

  • मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
    वरिष्ठ पत्रकार