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रविवार रात को राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा मध्य प्रदेश से राजस्थान में प्रवेश करेगी। ये प्रदेश कांग्रेस की आपसी जंग के लिए काफी समय से पार्टी नेताओं के मध्य खास चर्चा में है। सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच नेतृत्त्व की लड़ाई अब तो जग जाहिर है। राहुल की नजर भी इस लड़ाई पर है और वे पर्दे के पीछे रहकर इस लड़ाई में लगातार शीत युद्ध की स्थिति भी बना रहे है।
कांग्रेस में ऐसा पहली बार हुआ सितंबर महीने में जब आलाकमान के दो पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रदेश प्रभारी अजय माकन यहां विधायक दल की बैठक लेने आये और खाली हाथ लौटे। खड़गे अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है। उसके बाद तो दोनों गुट के नेताओं के मध्य जुबानी जंग काफी आक्रामक हो गई। मामला यहां तक पहुंच गया कि खुद गहलोत ने भी सचिन को लेकर गद्दार का बड़ा बयान दे दिया। तो सचिन ने भी पलटकर आरोप खारिज कर उनके बयान का विरोध कर दिया।
बात बिगड़ती देख राहुल सक्रिय हुए। माकन प्रभारी का पद छोड़ सीएम गुट को कटघरे में खड़ा कर चुके थे। इस स्थिति में पार्टी ने राहुल के साथ चलकर खास विषयों पर सक्रिय रहने वाले संगठन महामंत्री के सी वेणुगोपाल को 29 दिसम्बर के दिन राजस्थान भेजा ताकि यात्रा तक स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। वेणुगोपाल ने सख्त हिदायत तो दी ही साथ ही गहलोत और पायलट को साथ बिठाकर बैठक की। फिर मीडिया में एकजुटता का संदेश दिया। तब लगा कि पार्टी सख्त है। इस पूरे मामले में खास बात ये रही कि अनुशासनहीनता का नोटिस झेल रहे मंत्री शांति धारीवाल व महेश जोशी को यात्रा में किसी तरह की प्रत्यक्ष जिम्मेवारी नहीं दी गई। इनको सरदारशहर उप चुनाव से भी दूर रखा गया। ये बड़ा राजनीतिक संकेत है।
वेणुगोपाल की सख्ती के बाद सीधी बयानबाजी पर तो लगाम लगी मगर इक्का दुक्का तीर अप्रत्यक्ष रूप से तो चल ही रहा है।
राहुल की यात्रा एक तरफ जहां कांग्रेस के लिए जमीन पर माहौल तैयार करेगी वहीं आपसी लड़ाई को भी पूरी तरह से समझेगी। चूंकि यात्रा से सभी विधायक जुड़ेंगे तो उनसे भी राहुल की बात होगी जो संकट के निर्णय का धरातल तैयार करने की प्रक्रिया बनेगी। दोनों गुट इसको लेकर भी भीतर ही भीतर तैयारी कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखकर राहुल ने ये भी तय किया है कि कौन नेता राहुल के साथ चलेगा और बात कर सकेगा ये गहलोत और पायलट नहीं, जयराम रमेश व दिग्विजय सिंह तय करेंगे। जबकि अन्य राज्यों में वहां के नेता ये तय करते थे। ये भी विवाद पर लगाम की कोशिश का निर्णय है।
राहुल की यात्रा जब राजस्थान में होगी तब ही गुजरात व हिमाचल के चुनाव परिणाम भी आ जायेंगे। प्रदेश के विधायकों से भी बात हो जायेगी। इसलिए राजनीति के जानकारों का मानना है कि यात्रा जैसे ही राजस्थान से निकलेगी, यहां के संकट पर पार्टी बड़ा निर्णय कर लेगी। क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे भी राजस्थान पर नजरें रखे हुए हैं। राजस्थान कांग्रेस के लिए राहुल की भारत जोड़ों यात्रा स्थिति में बदलाव की भूमिका तय करेगी, ये तय है। ये बदलाव क्या होगा, उस पर अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। क्योंकि पार्टी नेतृत्त्व हर हाल में अगला चुनाव जीतना चाहती है, जो बिना गुटों के एक हुए सम्भव नहीं। इसीलिए यात्रा को स्थिति में बदलाव के लिए महत्ती माना जा रहा है।


– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार
