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पहचाने स्वयं को

इंसान जब जन्म लेता है तो अपने साथ अपना भाग्य लेकर आता है, बस आसपास का वातावरण उसे फलाता है फुलाता है। कई बच्चों को बहुत अच्छा वातावरण मिलता है तब वह जीवन के अच्छे रास्ते चुन लेते हैं और कई बच्चों को वह वातावरण नहीं मिल पाता तो वह या तो वह स्वयं कोई रास्ता चुन लेते हैं या फिर पीछे रह जाते हैं। कई बच्चों को जब गलत वातावरण मिलता है तो वह क्रिमिनल बन जाते हैं और गैरकानूनी धंधे में लग जाते हैं। यह बात अलग है कि कानून की परिभाषा क्या तो हम जिस देश में रहते हैं वहां के संविधान में वहा की न्याय प्रणाली में जो व्यवस्था रखी है, वह कानून है और प्रत्येक देशवासी उस कानून को मानने के लिए बाध्य है। यह तो एक अपनी जनरल बातें हुई अब बात यह है कि हम किसी भी परिवेश में हो पर हम स्वयं को पहचानने की पूरी पूरी कोशिश करें। हममे क्या हुनर है हममे कितनी दूर दृष्टि है, हमारे शरीर में कितना रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ही हुई है, हम क्या कर सकते हैं हम क्या नहीं कर सकते और कितना सहन कर सकते हैं, हमें क्या करना होगा ताकि हमारा भविष्य परिवार के साथ अच्छा बित सके। इन सब बात पर आप जरूर सोचिये आप में बहुत सारे गुण हैं बहुत सारी ताकत है बहुत सारे हुनर है बस उन्हें आप खोजें और अपने जीवन को शांति प्रिया तरीके से निकाल कर गर्व महसूस करें।
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)

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