– कुलरिया परिवार ने कथा में गोहितार्थ कुल 21 लाख रूपयें दिए

– कथा विश्राम के दिन प्रसिद्ध उद्योगपति व समाजसेवी भंवर कुलरिया का हुआ आगमन

– कथा प्रारम्भ होने से पूर्व संत दुलाराम की भव्य शोभायात्रा का हुआ आयोजन

– कथा विश्राम के दिन झोली पाण्डाल में फेराई, आये 3 लाख 75 हजार रूपयें

– अपने स्वार्थ के लिए कभी किसी के उपकार को न भूलें-महामण्डलेश्वर

नागौर।नागौर विश्व स्तरीय गो चिकित्सालय, नागौर द्वारा आयोजित ब्रह्मलीन गो सेवी संत दुलाराम कुलरिया सिलवा, नोखा (बीकानेर) वालो की पुण्यतिथि पर महामण्डलेश्वर स्वामी कुशालगिरी महाराज के सानिध्य में गोहितार्थ श्रीमद् भागवत कथा के सप्तम् दिवस की कथा में कथा वाचिका देवी ममता ने बताया कि ‘स्व दामा यस्य सः सुदामा’ अर्थात अपनी इंद्रियों का दमन कर ले वही सुदामा है।
सुदामा के आने की खबर पाकर किस प्रकार श्रीकृष्ण दौड़ते हुए दरवाजे तक गए थे। ‘पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल से पग धोए’। अर्थात श्री कृष्ण अपने बाल सखा सुदामा के आगमन पर उनके पैर धोने के लिए पानी मंगवाया परन्तु सुदामा की दुर्दशा देखकर इतना दुख हुआ है कि आँसुओं से ही सुदामा के पैर धुल गए है। सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गये। प्रसंगानुसार जसवंतगढ़ की प्रसिद्ध झांकी टीम द्वारा ‘गोपियो के साथ कृष्ण झूला झूलते’ व ‘कृष्ण सुदामा मिलन’ की दिव्य सजीव झाँकियों का प्रस्तुतिकरण किया गया। सातवें दिन कथा में यजमान सियाराम गुर्जर उनकी धर्मपत्नी सुमन देवी बने। आज संत दुलाराम की पुण्यतिथि पर कथा के प्रारम्भ होने से पूर्व डी.जे पर भजनों के साथ गो चिकित्सालय में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

कथा के मध्य महामण्डलेश्वर स्वामी कुशालगिरी महाराज ने प्रवचन के दौरान ‘इन्द्रदेव व तोते’े का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि इन्द्रदेव तोते की पेड़ के प्रति स्वामी भक्ति देख बहुत खुश हुए। अपने स्वार्थ के लिए किसी का उपकार नही भुलना चाहिए।
कथा विश्राम के दौरान ब्रह्मलीन संत दुलारामजी कुलरिया के सुपुत्र प्रसिद्ध उधोगपति एवं समाजसेवी भंवर कुलरिया का आगमन हुआ। व्यासपीठ की और से भंवर कुलरिया के तिलक लगाकर, पुष्पवर्षा कर, पुष्पमाला-साफा पहनाकर धूमधाम से स्वागत सम्मान किया गया। कथा के दौरान कुलरिया परिवार ने गोहितार्थ कुल 21 लाख रूपयें का सहयोग किया। देवीजी के माता का परिवार सहित आगमन हुआ।
इसी दौरान संत ओमजी महाराज का आगमन हुआ। लालचंद , पपसा कच्छावा, रामचन्द्र भाटी सहित अनेक दानदाताओं ने गोहितार्थ सहयोग किया। सभी दानदाताओं का व्यास पीठ की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। रोजाना की तरह प्रेमसिंह सोलंकी, पीराराम, प्रेमाराम, शंकरलाल, मगराज भदवासिया मंडी जोधपुर वालों ने पीड़ित गोवंश हितार्थ 1-1 गाड़ी हरी सब्जी भेजी। कथा विश्राम के दिन पाण्डाल में गोदान हेतु झोली फेराई गयी जिसमें 1 लाख रूपयें की दानराशि भंवर कुलरिया ने झोली में डाली, झोली करीब 3 लाख 75 हजार रूपयें से भी अधीक का गोदान आया।