
आंधल घोटो और जमाल घोटो खेल का उत्सव में सम्मिलित हो रहे सभी स्टूडेंट्स ने जमकर लुत्फ उठाया। इस अवसर पर खैरीवाल ने कहा कि हमारी परंपराएं और हमारे संस्कार डिजिटल युग में कहीं लुप्त न हो जाए इसलिए इस तरह के पारंपरिक पर्वों के माध्यम से विद्यार्थियों को पुरातन खेलों के बारे में जानकारी का इस से बेहतर और कोई रास्ता नहीं हो सकता। यह गौरव की बात है कि विद्यापीठ सदैव ही अपने नवाचारोन्मुखी आयामों की बदौलत स्टूडेंट्स व सोसाइटी को देश की गौरवशाली संस्कृति से जोड़ने के लिए समर्पित भाव से प्रयासरत है। कार्यक्रम का संचालन राण सिंह राजपुरोहित ने किया जबकि आभार भंवरी देवी ने व्यक्त किया। “धाड़ धुक्कड़” के दूसरे दिन बुधवार को कबड्डी, गिल्ली डंडा, बर्फ पानी इत्यादि पारंपरिक खेलों का आयोजन किया जाएगा।